2045: एक ह्यूमैन ओडिसी

क्या आपने किसी ऐसे वक्त की कल्पना की है, जब मृत्यु और नश्वरता जैसी चीजों का अस्तित्व मिट जाएगा और मनुष्य अमरता को प्राप्त कर एक चेतना के रूप में हमेशा मौजूद रहेगा. विज्ञान फंतासियों की यह कल्पना अगले तीस-चालीस सालों में एक वास्तविकता का रूप ले सकती है.

Image courtesy: 0fjd125gk87 (Pixabay)

दिमित्रि इस्तकोव नामक एक 32 वर्षीय रूसी अरबपति ने एक ऐसी योजना का ऐलान किया है, जिसके अगले तीन दशक में इंसानों को टमिनेटर स्टाइल का सायबोर्ग बनाने में कामयाबी हासिल कर ली जाएगी. सरल भाषा में कहें तो 2045 तक कभी न मरने वाला ऐसा महामानव बनकर तैयार हो जाएगा, जिसका कुछ हिस्सा मानव शरीर और कुछ हिस्सा रोबोटिक मशीन होगा.

दिमित्रि इस योजना को तीन साल पहले ही शुरू कर चुके हैं और इसके मूर्तरूप लेने में करीब तीस साल का समय लगेगा. इस योजना का लक्ष्य एक व्यक्ति के मन और चेतना को एक जीवित मस्तिष्क से एक मशीन में स्थानांतरित करना है. इस प्रक्रिया में इंसान का व्यक्तित्व और स्मृति भी पूर्ववत रहेगी. इस तरह के सायबोर्ग का कोई भौतिक स्वरूप नहीं होगा और इंसान का ये सूक्ष्म शरीर इंटरनेट की ही तरह एक नेटवर्क के रूप में अस्तित्व में रहेगा. यह सायबोर्ग प्रकाश की गति से पूरी धरती पर विचरण कर सकेगा. यहाँ तक कि वह अंतरिक्ष में भी यात्रा कर लेगा. इस महत्वाकाक्षी योजना को तीन चरणों में बांटा गया है.

अवतार-ए: इसके तहत एक व्यक्ति अपने रोबोटिक इंसानी स्वरूप का खुद नियंत्रण कर सकेगा, जो कि एक ब्रेन मशीन इंटरफेस (बीएमआई) की बदौलत संभव होगा. यह तकनीक तैयार हो चुकी है और कई जगह आंशिक तौर पर इसका सफल परीक्षण किया जा चुका है. यह चरण 2020 तक पूरा होना है.

अवतार-बीः इसमें मनुष्य की मृत्यु के बाद उसके दिमाग का ट्रांस्प्लांट एक मशीनी शरीर में करना शामिल है. यह वर्ष 2025 तक पूरा किया जाना है.

अवतार-डी: यह एक होलोग्राम या डायग्राम जैसा अवतार होगा, जो कि इस परियोजना का अंतिम लक्ष्य है, लेकिन यह वैकल्पिक होगा. इसकी वजह यह अनुमान है कि शायद सभी मनुष्य इसके इच्छुक न हों. पिछले चरण जैविक रोगों को रोका गया है, लेकिन अभी भी यह वर्तमान तकनीकी उपलब्धियों और भौतिकी पर हमारी समझ के हिसाब से बहुत दूर है.ीन में इंसानी दिमाग का ट्रांस्प्लांट होगा लेकिन व्यक्ति के समूचे व्यक्तित्व के साथ होगा. 2045 तक एक व्यक्ति अपने मानसिक स्वरूप में दुनिया में बिना किसी माध्यम के विचरण कर सकेगा. यह चरण 2035 तक पूरा किया जाना है.

  • श्वेता अग्रवाल

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