आदिवासी बोली को सहेजेगा पावरी भाषाकोश 

योग्यता के बावजूद आदिवासी छात्र भाषाई बाधा के कारण ही स्कूली शिक्षा में पिछड़ जाते हैं. विधायक डॉ. संजय कुटे, एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना एवं जिला कलेक्ट्रेट की एक साझा पहल से अब यह समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी..  पिछले ढाई साल के गहन शोध के माध्यम से राइज फाउंडेशन ने पांच भागों का ‘पावरी भाषाकोश’ बनाया है और इन पुस्तकों का प्रकाशन विश्व आदिवासी दिवस (रविवार 7 अगस्त) के अवसर पर जलगांव के जमोद में किया जाएगा. लगभग साढ़े चार हजार शब्दों वाले इस शब्दकोष के कारण मातृभाषा, राज्य भाषा, देशी भाषा और ज्ञान भाषा अंग्रेजी की शब्दावली तक एक साथ पावरी समुदाय के छात्रों की पहुंच में होगी.

छात्रों को सीखने का आनंद लेने के लिए, सरकार मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर देने वाली सरकार ने इस पहल के तहत प्री-प्राइमरी, प्राइमरी और सेकेंडरी वर्ग के छात्रों के लिए अभिनव तरीके से क्रमिक और अन्य पुस्तकों का निर्माण किया है. राज्य भर के छात्र जिनकी मातृभाषा मराठी है, इस पहल से लाभान्वित हो रहे हैं.  अकोला, अमरावती, नंदुरबार, धुले जैसे आदिवासी बहुल जिलों में कोरकू, भील, पवारा, निहाल, भिलाला समुदाय रहते हैं. चूंकि इस समुदाय के छात्रों की मातृभाषा अलग है, इसलिए समय-समय पर यह बात सामने आ रही थी कि केवल मराठी किताबें ही उनके लिए बहुत उपयोगी नहीं हैं, बल्कि उनका स्वतंत्र रूप से सोचना भी आवश्यक है, ताकि समाज में छात्रों की शिक्षा बाधित न हो और वे पढ़ने का आनंद उठा सकें.

इस आवश्यकता को महसूस करने के बाद, मेलघाट के आदिवासी भाइयों के लिए काम कर रहे राइज फाउंडेशन ने वर्ष 2018 में कोरकू छात्रों के लिए एक बहुभाषी ज्ञानकोश बनाया. इसी दौरान उन्हें विभिन्न आदिवासी समुदायों के छात्रों के लिए उनकी मातृभाषा में किताबें बनाने का विचार आया. विधायक डॉ. संजय कुटे, कलेक्टर एस. राममूर्ति, एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना अपर आयुक्त सुरेश वानखेड़े, अकोला परियोजना अधिकारी आर.बी. हिवाले की पहल पर 2019 में पावरी समुदाय के छात्रों के लिए ऐसी डिक्शनरी तैयार करने का निर्णय लिया गया.

इसके बाद राइज फाउंडेशन के निदेशक आचार्य ऋषिकेश खिलारे, परियोजना समन्वयक हर्षदा लोंधे-खिलारे ने 45 गांवों के 500 से अधिक ग्रामीणों के साथ बातचीत करते हुए ढाई साल तक गहन शोध किया. पावरी बोलियों के एक स्थानीय अध्ययन समूह और पुणे, मुंबई, औरंगाबाद के 11 सदस्यों की एक भाषा समिति ने इन सभी प्रविष्टियों की जाँच की और उन्हें पूर्व-प्राथमिक, प्राथमिक और माध्यमिक समूहों के छात्रों की भाषाई आवश्यकताओं के अनुसार पाँच वर्गों में वर्गीकृत किया. माई स्कूल, माई नेबरहुड, माई वर्ल्ड, माई कल्चर एंड माई स्टडी, ये पांच खंडं पावरी भाषाकोश का मूल आधार हैं. अच्छी रंग योजना, चित्रों का बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग, आसान संचालन के लिए निर्धारित पुस्तकों का आकार इस शब्दकोश को छात्रों के लिए अत्यंत आनंददायक बनाता है. प्रकाशन जगत में अग्रणी संगठन के रूप में विख्यात ग्रंथाली प्रकाशन ने शब्दकोशों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

ऐसा है शब्दकोश

शब्दकोश को पांच खंडों में विभाजित किया गया है, मेरा स्कूल, मेरा पड़ोस, मेरी दुनिया, मेरी संस्कृति और मेरा अध्ययन. शब्दकोश मराठी, हिंदी और अंग्रेजी पर्यायवाची शब्द देता है और पावरी बोली में हर शब्द का उच्चारण करता है. शब्दों के अनुसार न केवल शब्द बल्कि चित्र भी दिए गए हैं ताकि अर्थ को शीघ्रता से समझा जा सके. इस शब्दकोश की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता माझी संस्कृति खंड है जो छात्रों को उनकी संस्कृति, त्योहारों और रीति-रिवाजों को जानने के लिए अलग से तैयार किया गया है. पावरी, भिलाला, निहाली भाषाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है, शोधार्थियों द्वारा उनकी ई-पुस्तक प्रकाशित की जायेगी तथा संस्था से धनराशि उपलब्ध होने पर संस्थान एवं शोधार्थी 15 अक्टूबर को इसके व्यापक प्रकाशन के लिये तैयार हैं.

हुकू बाकू महोत्सव का भी आयोजन

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर 6 से 8 अगस्त तक हुकू बाकू-पश्चिम मेलघाट सांस्कृतिक मेला का आयोजन किया गया है. आदिवासी लोक संस्कृति का अनुभव करने का अवसर देने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में राज्य भर के गणमान्य व्यक्ति, उद्यमी, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, भाषाविद उपस्थित रहेंगे.

कोरकू, पावरी, भिलाला और निहाली भाषाओं के 75,000 शब्दों की खोज, पूर्ण स्वतंत्रता का अमृत, स्वतंत्रता के वर्ष में 75,000 शब्दों के संग्रह और शोध के दिवंगत राष्ट्रपति महामहिम डाॅ. कलाम जी सपने को पूरा करने के साथ ही, इन 75000 शब्दों को अनुसंधान द्वारा पेश किया गया है आचार्य ऋषिकेश खिलारे व शोध सहायक हर्षदा खिलारे की ओर से यह अनुपम कोश डाॅ. सुनीलभाऊ देशपांडे व संपूर्ण बंबू केंद्र लावड़ा के डॉ. शौनक कुलकर्णी जी को एक आदरांजलि है, जो कोरोना वायरस के कारण हमसे बिछड़ गए थे.

  • धनंजय भिडे,राइज फाउंडेशन

Add Comment