द एड्रेस

आज मुझे एक ऐसी फिल्म देखने को मिली, जिसके बारे में न लिखना फिल्म के साथ ज्यादती ही होगी… यह फिल्म है, मेलविलासम (अंग्रेजी नाम द एड्रेस करीब पौने दो घंटे की यह मलयालम मूवी एक सैन्य—कोर्टरूम ड्रामा है, जिसमें आरोपी एक जवान है, जो… Read More

आखिरी प्रेमगीत

किताबें तो हम सभी पढ्ते हैं और अगर कोई किताब बहुत अच्छी लगने लगे तो उसमें उतरकर उसे पढ़ते हैं, लेकिन युवा लेखक अभिषेक जोशी का उपन्यास आखिरी प्रेमगीत एक ऐसी रचना है, जिसे आप अपने भीतर, किसी रेल की तरह दिल को दिमाग से… Read More

नारियल से सख्त और मीठे जस्टिस त्रिपाठी

अधिकतर हिंदी फिल्मों में जज की भूमिका, अगर वह नायक न हो तो, बहुत ही संक्षिप्त होती है, जो अदालत की कार्रवाई शुरू होने से लेकर फैसला दिए जाने के बीच ही सिमटकर रह जाती है. लेकिन, पिछले साल आई जॉली एलएलबी के जस्टिस त्रिपाठी के… Read More

मुश्किलों के मुसाफिर

कुछ किताबें ऐसी होती हैं, जिनके बारे में कुछ कहना सूरज को चिराग दिखाने जैसा होता है. जूल्स वर्न की जर्नी टू द सेंटर आॅफ द अर्थ ऐसी ही एक किताब है. इसका हिंदी अनुवाद फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशंस ने प्रकाशित किया है. जैसा कि इसके नाम… Read More