विदा होगा एक्सप्लोरर

जो समय के साथ नहीं बदलते, समय उनको अप्रसांगिक कर देता है. इसकी एक सटीक और ताजा मिसाल है, माइक्रोसॉफ्ट का इंटरनेट एक्सप्लोरर वेब ब्राउजर, जो आगामी 15 जून को बंद होनें जा रहा है.

Image courtesy: Geralt(Pixabay)

इंटरनेट की दुनिया बदल देने वाले, अपने समय के इस सबसे सफल और पहले मुफ्त ब्राउजर को एक समय 95 प्रतिशत लोग यूज करते थे, जो अब दस प्रतिशत भी नहीं बचे हैं. इसकी घटती लोकप्रियता की वजह रही, इसका समय के साथ अपग्रेड न होना.

इसके विपरीत गूगल के क्रोम ब्राउजर ने लगातार नई—नई सुविधाएं और फीचर्स एड करते हुए अपनी अहमियत बनाए रखी, जिसकी वजह से ब्राउंजिंग की दुनिया के 67 प्रतिशत नेटिजन इसके हिस्से में बने हुए हैं.

16 अगस्त 1995 को लॉन्च हुए एक्सप्लोरर के एकछत्र साम्राज्य को पहली चुनौती 2002​ में मोजिला फायरफॉक्स से मिली थी, जिसने इसके यूजर्स बेस में गहरी सेंध लगाई और एक्सप्लोरर यूजर्स की संख्या घटकर पचास फीसदी रह गई. रही सही कसर 2008 में लॉन्च हुए गूगल क्रोम ने पूरी कर दी.

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