शो है या कोई शहर!

विश्व के सबसे बड़े ट्रेड और टेक्नोलॉजी शो, दुबई एक्सपो को एक सप्ताह पूरे हो गया है. छह महीने और करीब साढ़े चार किमी (4.38 वर्ग किमी) में फैला यह एक्सपो इतना बड़ा है कि एक औसत आकार का कस्बा भी इससे छोटा नजर आएगा. यही वजह है कि एक्सपो में घूमने के लिए दर्शकों के लिए एक नई मेट्रो लाइन ही बिछा दी गई है और जो स्टेशन बनाया गया है, वह देखने में एक अंतरिक्ष यान सरीखा है.

नवाचार और नए विकल्पों पर केंद्रित इस एक्सपो हर रोज करीब साठ शो आॅर्गेनाइज किए जाएंगे. इसमें करीब दो सौ देश हिस्सा ले रहे हैं, जिन्होंने अपनी खासियतों को विशाल पवेलियनों में प्रदर्शित किया है. ज्यादातर का जोर भविष्य के आइडिया पर ही है. जैसे भारत का पवेलियन मिशन मंगलयान से रूबरू कराएगा तो चेक रिपब्लिक का वाटर ट्री, सौर ऊर्जा की मदद से हवा से पानी पैदा करेगा. फिनलैंड के पवेलियन में विजिटर्स द्वारा छोड़ी गई कार्बन डाइआक्साइड से बिजली बनेगी तो सऊदी अरब अपने पवेलियन में सबसे बड़ा एलईडी मिरर डिस्प्ले, सबसे बड़ी इन्ट्रेक्टिव स्क्रीन और सबसे बड़ा वाटर फीचर डिस्प्ले कर के तीन वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाएगा.
शो के दूसरे आकर्षणों में 160 लोगों को ले जाने में सक्षम दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट, पहली बार महिलाओं को डेडीकेटेड वूमैन पवेलियन आदि प्रमुख हैं.
इस शो में अगले छह महीनों में कम से कम ढाई करोड़ अतिथियों के आगमन की उम्मीद है, जिनमें 1.7 करोड़ फॉरेनर गेस्ट होंगे. इस आयोजन से दुबई को 17.7 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू हसिल होने की उम्मीद है.

  • श्वेता अग्रवाल

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