जब G से न होगा जिराफ

जिन लोगों ने अपनी अल्फाबेट सीखने की शुरूआत ए फॉर एप्पल, बी फॉर बैट… और जी फॉर जिराफ के साथ की है, उनके लिए यह खबर इमोशनली दुखी करने वाली हो सकती है कि इस विशाल मगर क्यूट और वैजी प्राणी के सामने अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है.

Image courtesy: Alexas_Fotos(Pixabay)

इंसान द्वारा जंगली जानवरों के शिकार ने बाघ, हाथी, गैंडों के अलावा जिन जीवों के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है, उनमें जिराफ प्रमुख है. हाल के वर्षों में जिराफों की संख्या काफी तेजी से कम हो रही है, जिससे ​चिंतित पर्यावरण संरक्षणवादियों ने चेतावनी दी है कि अगर यही हाल रहा तो बहुत जल्द धरती पर जिराफ का नामोनिशान भी नहीं बचेगा. इंटरनेशनल यूनियन फॉर द कंजवेंशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि ​पिछले चार दशकों में, जिराफों की संख्या साठ फीसदी कम हो चुकी है. 1985 में जिराफों की संख्या 1,51,000 और 1,63,000 के बीच थी, जो इस साल घटकर सिर्फ 68 हजार रह गई है.

ज्ञातव्य है कि 2016 में वैज्ञानिकों ने जिराफ की चार अलग-अलग प्रजातियों के बारे में पता लगाया था, जिनमें तीन आईयूसीएन की 35 विलुप्तप्राय जीवों की सूची में शामिल हैं.

  • श्वेता अग्रवाल

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