सोशल मीडिया के हकीम

किसान दूसरे किसान के पास गया और बोला कि पिछले हफ्ते तेरी भैंस को अफारा हुआ था तो तूने ​क्या किया था. वह बोला कि मैंने मिट्टी के तेल में नमक घोल कर पिलाया था. अगले दिन पहला वाला किसान रोता हुआ दूसरे के पास आया और बोला मेरी भैंस तो मर गई. ‘मेरी भी मर गई थी…’ दूसरे ने मासूमियत से जवाब दिया.

इस जोक पर आप हँस सकते हैं, लेकिन अगर आप सौंदर्य या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर सोशल मीडिया, खासकर व्हाट्स एप्प और फेसबुक, पर दी जाने वाली सलाहों का अनुसरण करने के आदी हैं तो हो सकता है ​​कि कभी आपको रोना पड़ जाए.

नीम हकीम, खतरा—ए—जान की कहावत यूं ही नहीं कही गई है… और सोशल मीडिया पर नीम हकीमों की भरमार है. फेक न्यूज को काउंटर करने के लिए शुरू किए गए टाइम्स इ​निशिएटिव ब्रेक द चेन के मुताबिक फेक न्यूज का 67 प्रतिशत हिस्सा हेल्थ केअर से रिलेटेड कंटेंट का होता है, इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि समस्या कितनी गंभीर है.

सफेद कोट पहने नजर आने वाला हर व्यक्ति डॉक्टर नहीं होता और यूट्यूब पर नजर आने वाले वीडियो में तो बिल्कुल भी नहीं. प्रसिद्ध लोगों की तस्वीरें लगाकर हेल्थ ​और ब्यूटी टिप्स को आजमाने की बात जब भी आपके दिमाग में आए, उसे जानकार लोगों से वैरीफाई जरूर कर लें. कहीं ऐसा न हो कि बाल काले करने या नए बाल उगाने वाला घर में बनाया कोई तेल आपको पूरी तरह टकला न कर दे, रंग निखारने या झुर्रियां दूर करने की होममेड पेस्ट आपकी त्वचा के पिगमेंटेशन को नष्ट न कर दे, चर्बी कम करने का कोई अनुभूत प्रयोग आपको हृदय रोगी न बना दे, चश्मा उतारने के लिए आँखों के साथ किया जाने वाला कोई प्रयोग आपकी दृष्टि ही न छीन ले.

वीडियो के थंबनेल पर लिखे दस दिन में चमत्कार, 21 दिनों में गारंटेड इलाज जैसे लुभावने जुमले किसी भी पीड़ित व्यक्ति को आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वे दावे सही हों. आप सोच सकते हैं कि वीडियो पोस्ट करने वाले व्यक्ति का भला झूठ बोलकर क्या मिलने वाला है. मिलता है, आपके व्यूज और लाइक उसके चैनल को कमाऊ बनाने में मदद करते हैं, इसी के लिए वह झूठे और अप्रमाणिक दावे कर अधिक से अधिक लोगों को आकर्षित करना चाहता है. उसकी मजबूरी हो सकती है, लेकिन आप उस पर यकीन करने के लिए मजबूर नहीं हैं. कम से कम इतना तो आप कर ही सकते हैं कि उसके बताए नुस्खों पर अमल करने में जल्दबाजी न करें और कुछ दिनों तक इंतजार कर, लोगों के कमेंट पढ़ कर ही कोई राय बनाएं.

दरअसल हमारे देश में, डॉक्टर के पास परामर्श के लिए जाना काफी महंगा पड़ता है. इसलिए लोग घरेलू नुस्खों को आजमाना ज्यादा पसंद करते हैं. अमूमन, ये काम भी करते हैं. लेकिन अगर असर उल्टा हो तो यह डॉक्टर की फीस और दवाईयों से भी ज्यादा महंगा पड़ सकता है. ऐसा नहीं कि सारे मशवरे ही खराब या नुकसानदेह होते हैं. लेकिन, हर व्यक्ति के शरीर, पाचन और त्वचा की अपनी तासीर होती है. जरूरी नहीं कि किसी के लिए लाभदायक कोई चीज, आपके लिए भी लाभदायक ही हो… जोखिम की गुंजाइश हमेशा बनी रहने वाली है, इसलिए सोचसमझ कर ही कोई फैसला लें.

  • संदीप अग्रवाल

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