उपलब्धियों का उल्लास, चुनौतियों की चिंता

आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत एक साल चला राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम आज खत्म हो जायेगा., तो अब समय है अगले पच्चीस सालों पर विचार करने का, ताकि हम स्वतंत्रता का शताब्दी महोत्सव भी इसी उत्साह  और उल्लास के साथ मना सकें. यह एक ऐसा देश है, जिसके एक सौ छत्तीस करोड़ देशवासियों को एक-दूसरे से, शासन से, प्रशासन से बहुत सारी शिकायतें हमेशा बनी रहती हैं. लेकिन, इन शिकायतों से कई गुना ज्यादा प्यार भी है, उम्मीद भी है और भरोसा भी है. यही वजह है कि हम बहुत सारे मामलों में दुनिया को पीछे छोड़कर आगे बढ़े हैं और लगातार बढ रहे हैं.

Image courtesy : Rajmohan09 (Pixabay)

 बीते सालों में हमने दुनिया को  दिखाया है कि हममें कितनी शक्ति, दूरदर्शिता और ज्यादा आत्मविश्वास भरा हैं… लेकिन, अभी भी एक लंबा सफर बाकी है. बहुत से मामलों में हमें बहुत बेहतर होना है. जिसका अंदाजा विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय सूचकांकों को देखकर लगाया जा सकता है, जिसमें हम बहुत सारे देशों के मुकाबले बहुत नीचे के पायदान पर खड़े नजर आते हैं. 

लालकिले की प्राचीर से माननीय प्रधानमंत्री ने अगले 25 सालो में भारत को विकासशील देशों की कतार से निकालकर विकसित देश बनाने के लक्ष्य को लेकर की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है. अगर विकास की ही बात करें तो भारत विकास की दो प्रमुख कसौटियों, यानि प्रति व्यक्ति आय और मानव विकास सूचकांक में क्रमशः 144 वें/194 देश और 131वें/189 देश स्थान पर है. 

विकास को निर्धारित और सुनिश्चित करने वाले बाकी सूचकांकों पर भी नजर डालें तो सफर बहुत लंबा और मुश्किल जान पड़ता है. जैसे कि हम ईजी आॅफ बिजनेस डूइंग पर 2020 में जारी वल्र्ड बैंक की 190 देशों की सूची में 63 वें, आईएमडी की वल्र्ड कम्पटेटिवनेस रैंकिंग में शामिल 64 देशों में 43 वें, विश्व बौद्धिक संपदा संस्थान की ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2021 में 46वें/132 देश स्थान पर हैं. 

लेकिन, सब कुछ इतना निराशाजनक भी नहीं है. बहुत सारे क्षेत्रों में हमने उल्लेखनीय स्थान भी हासिल किया है. स्टार्टअप ईकोसिस्टम की कसौटी पर हम तीसरे सबसे बड़े देश है, और सबसे ज्यादा यूनिकाॅर्न कंपनियां रखने वाले देशों में सिर्फ अमेरिका और चीन ही हमसे आगे हैं. इसी प्रकार अन्स्र्ट एंड यंग की 2021 की रिन्यूएबल एनर्जी कंट्री इन्वेस्टमेंट अट्रेक्टिवनेस इंडेक्स में हम 40 देशों में से तीसरे स्थान पर हैं. क्रिप्टो को वैधता न देने के बावजूद इसे अपनाने के मामले में हम दुनिया में दूसरे स्थान पर हैं. 

चुनौतियां सिर्फ विकास से ही जुड़ी नहीं हैं. सामाजिक सूचकांकों में भी अभी हमें बहुत सारे प्रयास करने होंगे. चाहे वह खाद्य सुरक्षा हो या भ्रष्टाचार, आतंकवाद हो या शांति का मामला, सड़क सुरक्षा हो या यातायात की सुगमता, पर्यावरण हो या ग्लोबल वार्मिंग…

वल्र्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2021 में शामिल 149 देशों में सिर्फ 135 हमसे ज्यादा खुश हैं. खाद्य सुरक्षा के मामले में हमारा स्थान 71वां/113 देश हैं और ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2021 में 101/116 वां. रिपोर्टर विदआउट बाॅर्डर्स की प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2021 में हम 150 वें/182 देश स्थान पर हैं और वल्र्ड ह्यूमैन फ्रीडम इंडेक्स में 119 वें/165 देश पर. दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के बावजूद, डेमोक्रेसी इंडेक्स 2021 में हमारा 46वां/167 देश स्थान है. बच्चों को जीवन, स्वास्थ्य, शिक्षा, संरक्षण का अधिकार देने के मामले में हम दुनिया के 182 देशों की सूची में 113वें स्थान पर हैं, ग्लोबल पीस इंडेक्स में हमारा स्थान 135वां/163 देश है. विश्व स्तर पर पर्यावरण को लेकर जारी 2022 की इंडेक्स में हम सबसे नीचे 180वें और सस्टेनेबल डेवलपमेंट रिपोर्ट 2021 में 120वें स्थान पर हैं. दुनिया के 109 बेहतरीन स्मार्ट सिटीज की सूची में हमारा सिर्फ एक ही शहर (हैदराबाद) शामिल है. 

जाहिर है कि हमारी चिंताएं कम नहीं हैं. चिंता की बात यह भी है कि जिन सूचकांकों में हमें ऊपर होना चाहिए, वहाँ हम नीचे हैं और जिनमें शामिल ही नहीं होना चाहिए, वहाँ शीर्ष दस में हमारा नाम दर्ज नजर आता है. इंस्टिट्यूट आॅफ ईकोनाॅमिक्स एंड पीस की 2020 की ग्लोबल टेररिज्म इन्डेक्स में आतंकवाद प्रभावित देशों में हम आठवें स्थान पर हैं, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की करप्शन परसेप्शन इंडेक्स में हमारा स्थान 86 वां/100 देश यानि हम दुनिया के पंद्रहवें सर्वाधिक भ्रष्ट देश हंै. ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स में हम सातवें सबसे ज्यादा प्रभावित देश हैं, दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित 15 शहरों में से दस भारत के हैं, ट्रैफिक जाम की समस्या से सबसे ज्यादा जूझने वाले दुनिया के 11 शहरों में से तीन हमारे हैं. 

अब यह हम पर है कि हम हमारी नकारात्मक छवि पेश करती इन रिपोर्टों और सूचकांको को अवैज्ञानिक, अपूर्ण या दुर्भावनापूर्ण कहकर खारिज करते हैं या एक आईने की तरह देखते हुए आत्ममंथन और परिष्कार का मार्ग चुनते हैं. कोई भी देश हर कसौटी पर सर्वश्रेष्ठ नहीं हो सकता, लेकिन हम भारत हैं. हममें वह माद्दा है कि हम सब में नहीं तो ज्यादातर क्षेत्रों में सर्वोच्च स्थान हासिल कर सकें. 

जैसा कि माननीय प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विकास के लिए जरूरी पाँच प्रणों, जिनमें नागरिक कर्तव्य भी एक है, का जनआह्वान किया है, हमें उसे गंभीरता से लेना होगा.

यह एक सुखद स्थिति है कि हर घर तिरंगा अभियान के पोर्टल पर देश के छह करोड़ से ज्यादा नागरिकों ने तिरंगे के साथ अपनी सेल्फियां अपलोड कीं. यही एकजुटता और उत्साह अगर हम देश के विकास और गौरव को आगे बढ़ाने में दिखाएं तो 25 वर्ष इसके लिए पर्याप्त हैं.

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