कुछ पल जिंदगी के

क्या किसी के साथ ऐसा हुआ है कि आप किसी से जिंदगी में पहली बार मिलें, फिर भी आपको ये अहसास ही न हो कि, आपकी उनसे पहली मुलाकात हुई है. मेरे साथ जयपुर भ्रमण के दौरान ऐसा ही हुआ, मेरी बेटी और वाइफ ने जयपुर और रणथंभौर घूमने का कार्यक्रम बनाया और जयपुर घूमना एक यादगार हिस्सा बन गया जिंदगी का.

जयपुर में मेरा बचपन का दोस्त आशु रहता है जिससे पिछले 35 साल में मैं सिर्फ दो बार ही मिला हूँ, आशु की वाइफ हिमानी भाभी जी और बेटों से तो कभी मिला ही नहीं, फिर भी उनके निष्छल व्यवहार ने तो दिल खुश ही कर दिया और हमारे जयपुर टूर को यादगार बना दिया, वो भी तब दोस्त अपने सरकारी काम से दिल्ली गया हुआ था.

हम 14 मार्च को ट्रेन से दोपहर 3 बजे 20 घंटे का सफर करके जयपुर पहुंचे और सोचा ये था कि शाम तक आराम करेंगे फिर अगले दिन से घूमना स्टार्ट करेंगे, पर हिमानी भाभी जी का फ़ोन आया कि वो हमारे होटल आ रहें है 4 बजे तक, जैसे तैसे थके होते हुए भी तैयार हुए और होटल के बाहर आये, और एक स्मार्ट हैंडसम पुरु और भाभी जी को कार से उतरते देखा और उनकी मुश्कान और उनके व्यवहार ने, ना केवल दिल को प्रसन्न कर दिया बल्कि हमारी सारी थकान ही मिटा दी और पहले दिन ही हवामहल और आसपास की हर जगह को भाभी जी और पुरु ने घुमा दिया.

शायद कम ही लोगों को पता होगा विष्णु जी के आखिरी अवतार कल्कि जी का मंदिर भी है वो भी जयपुर में, बहुत ही शानदार मंदिर है जहां कोई आता जाता ही नही है.

अगले दिन दोस्त आशु के दोनों बेटे पुरु और अनमोल सुबह 7 बजे ही होटल आ गए और जयगढ़ फोर्ट, आमेर फोर्ट और जलमहल के अलावा कई जगह पर उन्होंने हमें घुमाया, दोनों बच्चों से मिलकर ऐसा एक बार भी नहीं लगा कि उनसे पहली बार मिल रहे है, दोनों बड़े प्यार से मिले, बड़ी इज्जत से जयपुर घुमाया. दोस्त कि कमी का अहसास तक होने नही दिया पुरु और अनमोल ने और शाम को गिटार पर एक से एक गाने सुनाकर तो दिल ही जीत लिया. अगले दिन भाभी जी ने टेस्टी दाल बाटी खिला कर तो मजा ही बांध दिया और जयपुर के रामचंद्र फालूदा वाले की टिक्की और फालूदा का स्वाद तो अभी तक याद है.

अगले दिन यानी 17 को हम रणथंभौर घूमने गए और जैसे ही पता चला दोस्त आशु भाई जयपुर लौट आये हैं हम फिर 18 को जयपुर लौट आये, आशु से मिलने की इतनी इच्छा हुई कि सवाई माधोपुर से जयपुर बिना टिकट या कहें ढाई बजे की ट्रेन का टिकट लिया और 11.30 बजे की दूसरी ट्रैन में बैठ कर जयपुर आ गए, पहली बार बिना टिकट के सफर किया डरते डरते, पर दोस्त से मिलने की तड़प ने ये गलत काम भी करवा दिया, शायद दोस्तों में कुछ अलग ही बात होती है एक अलग ही मजा मिलता है दोस्तों से मिल कर.

यहाँ एक बात जरूर कहूंगा, जब भी हम किसी दूसरे शहर घूमने जाते है और अपने किसी रिश्तेदार से मिलते है या उनके घर रुकते है तो वो बहुत खातिरदारी करते हैं कहाँ कहाँ घूमने की जगह है सब बताते है और कैसे जाना है ये भी बताते है, पर वो खुद नही आ पाते हैं अपने कामों में बिजी होने की वजह से, पर ये एक दोस्त ही होता है जो या तो खुद हमें हर जगह घूमाता है या जैसा हमारे साथ हुआ, अपने परिवार को ही भेज देता है हर जगह घुमाने को. मैं शायद लकी हूँ जिसे आशु जैसा दोस्त मिला, उसके प्यारे बेटे मिले और और एक भाभी मिली, जो जाते जाते बहन ही बन गई. शायद दोस्तो की बात ही कुछ और होती है जिसे शब्दो मे बयान नही कर सकते.

घूमने तो हम बहुत जगह जाते हैं पर कुछ ही ऐसी जगह होती है जो ऐसी यादें छोड़ जाती हैं जिन्हें भूल पाना मुश्किल ही नही, नामुमकिन होता है, दोस्तों के साथ बिताये वो कुछ पल, जिंदगी के खुशनुमा पल बन जाते हैं.

  • एड.संजीव शर्मा, पुणे

19 thoughts on “कुछ पल जिंदगी के

  1. बहोत खूब साहाब, आपका यात्रा का वरनन पडके ऐसा लगा की हम खुद ही जयपूर हो आये, आपको ऑर आपके दोस्त को हमारा सादर 🙏 ऐसे ही आपके अनुभव लीखा करे पडके दो पल दील खुश हो जाता है.

  2. Adv Ghanshyam Singh, Bombay High Court,

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    Sharma ji, shubh sandhya, aapne ye kahani likhkar bahut kuchh kah diya, ati su adra lekhan, bahut bahut shubh kamnayen….

  3. Pratap Pandurang Satav

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    Sirji, बहुत बधिया, दोस्तों के साथ बिताये वो कुछ पल, जिंदगी के खुशनुमा पल बन जाते हैं.

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