लगी आग माचिस में

महंगाई और माचिस दोनों का एक ही काम है. एक कीमतों में आग लगाती है, दूसरी चीजों में. अब खबर है कि माचिस पर भी महंगाई की मार पड़ने जा रही है और एक दिसंबर से एक रुपए में मिलने वाली माचिस के लिए उपभोक्ताओं को दो रुपए खर्च करने पड़ेंगे.

Image courtesy: Moritz320(Pixabay)

पर अच्छी बात यह है कि कीमत में होने वाली इस सौ प्रतिशत की वृद्धि, प्रभावी रूप से सिर्फ पचास—पचपन फीसदी ही बैठेगी, क्योंकि नए कीमत वाले पैक में 36 के स्थान पर 50 तीलियां रहा करेंगी.
नेशनल स्मॉल मैचबॉक्स मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन के मुताबिक माचिस की कीमतें 14 साल से स्थिर थीं, जबकि इस दौरान परिवहन लागत, निर्माण लागत और कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि होती गई है. ऐसे में कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई और चारा नहीं था.
इससे पिछली बार माचिस की कीमतें 2007 में बढ़ी थीं, जब इसकी कीमत पचास पैसे से बढ़ाकर एक रुपये प्रति माचिस की गई थी.

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