क्या है मेटावर्स ?

भविष्य का इंटरनेट’ के तौर पर प्रोजेक्ट किया जा रहा मेटावर्स, फेसबुक की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसके बारे में मार्क जुकरबर्ग का दावा है कि यह रीयल और डिजिटल जगत के बीच के फासलों को मिटाने का काम करेगा.

Image courtesy: Chenspec(Pixabay)

इस तकनीक के जरिए इंसान डिजिटल जगत में वर्चुअली प्रवेश कर सकेगा जहाँ उसे कुछ ऐसा महसूस होगा जैसे वह जिससे बात कर रहा है वो उसके सामने ही बैठा है जबकि असल में वे दोनों लोग एक-दूसरे से मीलों की दूरी पर मौजूद होंगे.
इस कल्पना को साकार करने के लिए .फेसबुक सबसे पहले यूरोपीय संघ में मेटावर्स नाम का वर्चुअल रियलिटी वर्जन पेश करने की तैयारी में है, जिसके लिए उसने ईयू में दस हजार लोगों को भर्ती करने की घोषणा की है.
फेसबुक का कहना है कि मेटावर्स में क्रिएटिव, सोशल और ईकोनाॅमिक फ्रंट पर नए आयाम खोलने की संभावना है, जिसे अगले पाँच सालों में साकार किया जाएगा.
2014 में फेसबुक ने ऑक्युलस नाम की एक कंपनी को दो अरब डॉलर में खरीदा था और तब से होराइजन नाम का एक डिजिटल जगत तैयार कर रही है जहां लोग वी आर तकनीक के जरिए एक दूसरे से संवाद कर सकते हैं.
अगस्त में ही कंपनी ने होराइजन वर्क रूम्स नाम का एक फीचर जारी किया था जिसमें वी आर हेडसेट पहन कर लोग वर्चुअल रूम में एक दूसरे के साथ मीटिंग कर सकते हैं. इन रूम्स में लोग अपने ही थ्री डी वर्जन के रूप में नजर आते हैं.
फेसबुक के अलावा और भी कई कंपनियां मेटावर्स में कदम आगे बढ़ा रही हैं, जिनमें डीसेंट्रालैंड नाम की एक ऑनलाइन कंपनी को सबसे आगे माना जा रहा है, जहाँ वर्चुअल कैसिनो में नौकरी भी पाई जा सकती है. इसी क्रम में फोर्टनाइट वीडियो गेम बनाने वाली एपिक गेम्स कंपनी ने हाल ही में बताया था कि वह उसने मेटावर्स में एक अरब डॉलर का इन्वेस्टमेंट हासिल कर चुकी है.

  • संदीप अग्रवाल

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