नया लेखन, नए लेखक

एक समय था जब सिर्फ वेदप्रकाश शर्मा जी, सुरेंद्र मोहन पाठक जी, अनिल मोहन जी, अमित खान जी या विनय प्रभाकर, विक्की आनंद, दिनेश ठाकुर और रीमा भारती आदि लेखकों की किताबें ही पढ़ने को मिला करती थी. फिर 2005 से 2015 के एक ऐसा समय आया कि बस भूले भटके ही किताबें मिलती थीं. किताबों का, लेखकों का जैसे अकाल ही पड़ गया हो, नए राइटर नहीं आ रहे थे या नए राइटर्स की बुक नहीं छप रही थीं.

Image courtesy: Lisa Fotios(Pexels)

फिर 2014-15 के दरम्यान कुछ नए राइटर्स आये, नए पब्लिशर्स आये और फिर से अच्छी किताबों का मिलना शुरू हुआ, नए पब्लिशर्स में सूरज पॉकेट बुक्स, हिंदी युग्म, फ्लाई ड्रीम्स, बुक कैफ़े, थ्रिलवर्ल्ड, नीलम जासूस कार्यालय आदि आये और नए लेखकों की बुक्स फिर से मिलने लगीं. इस दरम्यान जिन नए लेखकों को, मैंने पढ़ा उनमें कंवल शर्मा, शुभानंद, संतोष पाठक, देवेंद्र पांडेय,चंद्रप्रकाश पांडेय प्रमुख रहे.
अब सवाल ये है, कि क्या लेखक रेगुलर लिख रहे हैं या पार्ट टाइम लेखन ही कर रहे हैं, क्या उनकी संतोषजनक कमाई भी हो रही है या नही. वैसे तो इस सवाल का सही जवाब तो लेखक खुद ही जानता होगा, पर जब जवाब जानने के लिए मैंने लेखकों से बात की तो सबके अपने अपने जवाब थे अपने अपने रीजन थे कम लिखने के, किसी को लिखने से सही कमाई नहीं मिली, किसी को नोकरी की वजह से समय कम मिलता है, किसी को रिसर्च करने में समय ज्यादा लगता है. शायद सब अपनी अपनी जगह सही हों, पर मुझे पर्सनली ऐसा लगता है कि जो लेखक लगातार लिखता है या लिखना चाहता है तो उसे अपनी पहली दो चार किताबों से कमाई की ज्यादा उम्मीद नही करनी चाहिए, कमाई तब बढ़ेगी, जब उनके रीडर बढ़ेंगे, जब लेखक लगातार जल्दी जल्दी अपनी किताबें रीडर के सामने परोसेगा, अगर उनकी लेखनी में, कहानी में दम होगा तो 4 से 5 किताबें छपने के बाद अच्छी कमाई भी शुरू होगी, उससे पहले उम्मीद करना खुद से ज्यादती होगी.
आजकल लेखक के पास अपनी किताबों को बेचने के कई प्लेटफार्म अवेलेबल हो गए हैं जैसे बुक फ़ॉर्मेट के अलावा, ऑडियो बुक्स, किण्डल, पुष्तक मंडी या कई और.
आजकल देखने मे तो ये आया है कि एक लेखक कि एक बुक आने के बाद दूसरी आने में कम से कम 6 महीने या ज्यादा समय लग रहा है और जो लेखकगण पहली ही किताब पार्ट में लिखते हैं तो उनकी बुक का सेकंड पार्ट आने में इतना समय लगता है कि रीडर उनकी पहली बुक को ही भूल जाता है और अगर पहली बुक ही पसंद ना आये तो सेकंड बुक वो क्यों खरीदेगा.
इसका जीता जागता उदाहरण विवेक कुमार जी है जिनकी पहली बुक अर्थला 2015 के आसपास आई सेकंड मल्हार 2020 में तीसरी की कोई ख़बर नही, इसी तरह मेरे प्रिय लेखक चंद्रप्रकाश पांडेय जी भी हमे बहुत तरसा रहे है, उनकी अस्तित्व के बाद सेकंड पार्ट की कोई खबर नहीं और अवंतिका का सेकंड पार्ट आया, अब थर्ड पार्ट लाने में देरी होने का कारण तो उन्हें ही पता होगा, पर हम पाठकगण का इंतजार तो लंबे से लंबा ही हो रहा है. इसमें कोई शक नही कि वर्तमान समय मे हिंदी लेखन जगत में चंद्रप्रकाश पांडेय सबसे टैलेंटेड राइटर्स में से एक हैं.
इनके अलावा बहुत से ऐसे लेखक है जिनकी पहली बुक और दूसरी बुक के बीच लंबा गैप हुआ है या हो रहा है.
एक बात तो गर्व करने लायक है इन नए राइटर्स कि, की इन्होंने अपनी पहली ही किताब, अधिकतर राइटर्स ने, अच्छी या कहें बहुत अच्छी लिखी है, पर कुछ राइटर्स ने पहली किताब के बाद दूसरी किताब में बहुत गैप रखा या लिखी ही नही, शायद मुख्य कारण कमाई कम होना रहा होगा या वे दूसरे कामों में व्यस्त होंगे. ऐसे हर उस लेखक से मेरा निवेदन है कि वो पहली किताब से कमाई की उम्मीद करने के बजाये अपनी फैन फॉलोइंग बढ़ाने पर ध्यान दें, अच्छा लिखें, लगातार लिखें और रीडर को अपनी बुक्स पढ़ने को, खरीदने को मज़बूर कर दें, जैसा कि श्री संतोष पाठक जी ने कर दिखाया है, जिन्होंने नौकरी वो भी, लगातार टूर पर जाने वाली नौकरी करते हुए भी, 2020 में 10 और 2021 में 14 किताबें लिख कर ना सिर्फ नये लेखकों को लगातार लिखने के लिए प्रेरित किया बल्कि रीडर को भी अपनी बुक्स पढ़ने में व्यस्त रखा, साथ ही अच्छी या कहें बहुत अच्छी कमाई भी की.
संतोष पाठक जी के अलावा कंवल शर्मा जी, शुभानंद जी, देवेंद्र पांडेय, चंद्रप्रकाश पांडेय जी ने भी अपने पाठकों की संख्या में लगातार इजाफा किया है.
उत्कर्ष श्रीवास्तव ने रणक्षेत्रम, सौरभ कुदेशिया ने आव्हान सीरीज में अच्छा काम किया है. हॉरर में देवेंद्र प्रसाद जी अच्छा लिख रहे है. संदीप अग्रवाल जी एक बहुत अच्छी किताब रोबोटोपिया के बाद से चुप है. यही हाल सोम जैसवाल जी, विजय कुमार बोहरा जी, प्रवीण कुमार, विनोद दुबे, सुमित अग्रवाल, दिलशाद दिल से, जयदेव चावरिया, राजीव रोशन, देबाशीष उपाध्याय, रणविजय, जितेन्द्रनाथ जी, संजना आनंद का है जिनकी पहली किताब बहुत ही अच्छी रही पर दूसरी लिखने देरी हो रही है, इनकी अगली बुक्स का बेसब्री से इंतजार है.
अभिषेक जोशी जी की 3 बुक्स जिनमे टाइम मशीन उल्लेखनीय है, अजिंक्य शर्मा जी की 7 बुक्स, विकास  झा जी की शायद 3 या 4 बुक्स, अमित श्रीवास्तव, नवीन चौधरी जी की 2, मिथिलेश गुप्ता जी की भी शायद 4 बुक्स आ चुकी है. मोहन मौर्य जी की भी 4 बुक्स आई है और बहुत अच्छा सुधार किया है उन्होंने राइटिंग में और कहानी कहने की स्टाइल में. इनकी तरह ही अनुराग कुमार जीनियस ने भी अच्छा बहुत सुधार करके, अपनी फैन फॉलोइंग बधाई है, किस्मत का खेल, बढ़िया लिखी इन्होंने. देवेन पांडेय जी ने बाली सीरीज कमाल की लिखी है, और शुभानंद जी मास्टरमाइंड सीरीज के तीनों पार्ट के अलावा, जोकर सीरीज भी अच्छी लिखी है. ये सभी टैलेंटेड राइटर्स है, जिन्होंने रीडर्स को नए प्रकार की कहानियों से रूबरू कराया है.
सबा खान, जितेन्द्रनाथ, आलोक कुमार जी जेम्स हेडली चेज की बुक्स का बहुत ही अच्छा अनुवाद किया है. रमाकांत मिश्रा जी तो खुद कहते हैं वो बहुत स्लो लिखते है फिर भी उनकी 3 बुक्स, जिनमे महासमर दो पार्ट में प्रमुख है अच्छी लिखी है.राम पुजारी, अनिल पुरोहित, सुबोध भारतीय जी का भी अच्छा आगमन हुआ है हिंदी लेखन जगत में.
पहले लेखक एक हीरो बनाकर सीरीज लिखने में ज्यादा विश्वास रखते थे, आज के ये राइटर्स बिना सीरीज लिखे ही, अपने नए प्रकार के लेखन से सबका भरपूर मनोरंजन कर रहे हैं थैंक्स टू आल राइटर्स.

  • संजीव शर्मा, अधिवक्ता पुणे

12 thoughts on “नया लेखन, नए लेखक

  1. सही बात कही आपने। मेरे उपन्यास राख के बाद खाली हाथ आई है जो एक अनुवाद है। अगले उपन्यास में देरी हो गई है… कोशिश कर रहा हूँ कि जल्दी आये

    1. अनिल पुरोहित

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      संजीव शर्मा जी का खोजपूर्ण आलेख के लिए हृदय से आभार! वास्तव में आपने 2014 -15 के बाद लेखक ,पाठक और प्रकाशन में आए बदलाव का सटीक चित्रण किया है। ये सच है कि किसी भी लेखक को अपने लेखन में निरंतरता लानी होगी तभी वह पाठकों में लोकप्रिय होगा और आगे आय के रास्ते भी प्रशस्त होंगे। आपने नए पुराने सभी लेखकों का नाम इस आलेख में शामिल किया, स्वागत और धन्यवाद!

  2. BRAJESH KUMAR SHARMA

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    जानकारी से भरपूर और प्रेरणादायक लेख। इस लेख में आपने उपन्यास लेखन की वर्तमान स्थिति पर बहुत अच्छी तरह से प्रकाश डाला है, साथ ही लेखकों को और भी बेहतर प्रयास करने के लिए प्रेरित भी किया है। साधुवाद।

  3. बढ़िया👌👏👏 आप इतना विविध पठन कर पा रहे हैं इसके लिए आपको बधाई। इसी तरह अपने मानीखेज लेखों के जरिये विविध पुस्तकों तथा नवोदित लेखकों बाबत जानकारियां सभी पाठकों से साझा करते रहिए।💐💐

  4. वर्तमान स्थिति से अवगत कराता आलेख। आपकी बात से सहमत की लेखक को जल्द से जल्द लिखना चाहिए। लेखकों की कोशिश भी शायद यही रहती होगी। अगर ऐसा होगा तो ही काम चल पाएगा। तेज लिखने के साथ-साथ क्वालिटी लेखन भी जरूरी है। कई बार क्वालिटी लेखन करने के लिए ही वक्त लग जाता है। ऐसे लेखक विरले ही होते हैं जो कि तेज लेखन करने के साथ-साथ क्वालिटी को भी बनाकर रखें। विशेषकर अपराध साहित्य में। अगर ऐसा हो जाए तो हिंदी लोकप्रिय लेखन की दुनिया और समृद्ध हो जाएगी।

  5. नृपेंद्र शर्मा

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    बहुत सुंदर लेख लिखा आपने आदरणीय मेरी भी दो किताब के बाद तीसरी में दो साल का गेप हो गया। दो किताबें तैयार हैं लेकिन कुछ कारणों से पब्लिश नहीं हो पा रही हैं।

  6. बहुत बढ़िया लेख लिखा है।
    ये सच है कि लेखन की गति बहुत ज्यादा धीमी है, वर्ष में 3 किताब लिखने का खुद से किया हुआ प्रण अधूरा ही रह जाता है। लेकिन उम्मीद है इस वर्ष 2 किताबें प्रकाशित हो जाये

  7. Anurag kumar Genius

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    अति सुन्दर लेख के लिए दिल से आभार सर।

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