बनते हैं, टूटते हैं संकल्प

2022 ने दरवाजे पर दस्तक दे दी है, जिसे सुनकर 2021 ने अपना बोरिया बिस्तर समेटना शुरू कर दिया है. संकल्पों की सूचियां भी बाहर निकल आई हैं. नए साल और संकल्पों का रिश्ता बहुत पुराना है, आप ने भी यकीनन बहुत सारे संकल्प तैयार किए होंगे, जिन पर आप कल से अमल करने जा रहे हैं. तो चलिए, चलते हैं संकल्पों की दुनिया में और जानते हैं इनके इतिहास, समाजशास्त्र और मनोविज्ञान को, साथ ही कुछ शानदार टिप्स, इन्हें निभाते जाने के लिए…  

नए साल पर संकल्प क्यों लेते हैं…

संकल्प आखिर हैं क्या? इसका जवाब तलाशने से पहले हमें यह स्वीकार करना जरूरी है कि कोई भी व्यक्ति अपने आप में सम्पूर्ण नहीं होता. सभी में कुछ न कुछ खामियां जरूर होती हैं और वे इन्हें स्वीकार भी करते हैं और दूर भी करना चाहते हैं. संकल्प ऐसे ही नेक इरादों को अमली जामा पहनाने की प्रक्रिया है, जिसका मकसद है इंसान को उसके जीवन के लक्ष्य का एहसास कराना और तब तक कराते जाना, जब तक कि संकल्प टूट नहीं जाते. यूं तो संकल्प कभी भी लिए जा सकते हैं, लेकिन मनोविज्ञानी कहते हैं कि कुछ खास अवसरों से जुड़ी बातें ज्यादा समय तक याद रहती हैं. इसलिए हम संकल्प लेने के लिए कुछ खास मौकों का इंतजार किया करते हैं. जैसे कि जन्मदिन, कोई त्योहार या फिर नया साल…
संभवतः नये संकल्प लेने के लिए नया साल सबसे ज्यादा लोकप्रिय मौका है, जब दुनिया भर के लोग अपने आने वाले साल को बेहतर बनाने के लिए तरह-तरह के संकल्प लेते हैं. संकल्प अलग-अलग रूप में हो सकते हैं, कभी कुछ बुरी आदतों, जैसे कि धूम्रपान, गुस्सा, आलस्य आदि, से छुटकारा पाने के लिए तो कभी कुछ अच्छी आदतों, जैसे कि व्यायाम, समाजसेवा आदि, को अपनाने के लिए…

Image courtesy: USA-Reiseblogger(Pixabay.com)

संकल्प टूट क्यों जाते हैं….
संकल्पों के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन्हें लेने में जितना वक्त लगता है, टूटने में उसका एक प्रतिशत भी नहीं लगता. इसकी वजह यह है कि अधिकतर संकल्प हमारी सुविधाओं से नहीं बल्कि कठिनाईयों से जुड़े होते हैं. ये हमें वह करने के लिए बाध्य करते हैं, जो स्वाभाविक रूप से हमारे व्यक्तित्व या व्यवहार में शामिल नहीं होता. जब भी हम कुछ करने या न करने का संकल्प लेते हैं, हमें अपने आप से एक तरह की लड़ाई लड़नी पड़ती है और अधिकतर मामलों में हम हार जाते हैं. किसी काम को रोजाना करने का संकल्प लेते हैं और एक दिन भी वह न कर पाएं तो सारा जोश ठंडा पड़ जाता है. फिर वह एक दिन फैलता जाता है और अगले साल की शुरुआत तक पहुंच जाता है.

कहां से आई संकल्प लेने की परंपरा
माना जाता है कि संकल्प लेने की परंपरा की जड़े 153 ई.पू. तक जाती हैं, जो कि प्राचीन रोम के मिथक में मौजूद देवता जानुस से प्रेरित है, जिसके नाम पर जनवरी माह का नामकरण किया गया था. मान्यता के अनुसार जानुस के दो चेहरे थे-एक सामने देखता हुआ, दूसरा पीछे की ओर, जो उसे भविष्य और अतीत, दोनों को देखने में मदद करते थे. 31 दिसंबर को रोमवासी यह कल्पना करते थे कि जानुस पीछे वाले चेहरे से पुराने साल को देख रहा है और सामने वाले चेहरे से आने वाले साल को. इस प्रकार रोमवासियों के लिए यह एक प्रतीकात्मक समय बन गया, जब वे बीते साल की बातें भूलकर नए साल को बेहतर बनाने के लिए संकल्प ले सकते थे. उनका यह मानना था कि जानुस इस प्रकार उन्हें उनकी बीते साल की गलतियों के लिए क्षमा कर देगा और नए साल में स्वयं को बेहतर बनाने के उनके इरादे को जानकर उन पर अपनी कृपादृष्टि बनाए रखेगा. इस तरह नए साल पर संकल्प लिए जाने की शुरुआत हुई.

कौन से संकल्प सबसे ज्यादा लिए जाते हैं?
1. वजन घटाना 2. धूम्रपान छोड़ना 3. बेहतर नौकरी पाना 4. बचत करना 5.बेहतर नौकरी या शिक्षा पाना 6. दूसरों की मदद करना 7. स्वस्थ रहना 8. उधार के जाल में न फंसना 9. शराब से तौबा 10. तनाव से दूर रहना 11. चीजों को बार-बार इस्तेमाल करना, रिसाइकिल करना 12. सप्ताहांत में काम से दूर रहना 13. घर में शांति बनाए रखना 14. समय पर सोना और जल्दी उठना 15. योगा क्लासेज या जिम ज्वाइन करना.

संकल्प जो हम सब को लेने चाहिए
1. सेलिब्रिटीज के बारे में फेसबुक पर या ट्विटर पर ऊलजुलूल बातें न पोस्ट करना. 
2. अपने भूतपूर्व प्रेमी /प्रेमिका /पति/पत्नी की निंदा न करना. अतीत को अतीत ही मानकर चलें, उसे वर्तमान से चिपका कर न रखें. क्योंकि अतीत अगर वर्तमान की पूंछ पकड़े रहता है तो वह भविष्य में नहीं जा पाता.
3. रेगुलर एक्सरसाइज करते हुए एक दिन मिस हो जाने पर खुद पर नाराज न होना. एक दिन का मतलब हमेशा नहीं होता. अगर किसी वजह से कोई दिन चूक जाते हैं तो अगला दिन तो है. उसी से एक्सरसाइज जारी रखिए.
4. रूठे यारों को मनाना. ऐसे बहुत कम रिश्ते होते हैं, जिनमें तकरार न होती हो. और ऐसे रिश्ते और भी कम, जिनमें सुलह की गुंजाइश न हो. इसलिए रिश्ते को ईगो के तले दबकर न मरने दें, बल्कि इस गुंजाइश को तलाशें.
5. दुश्मनों से हाथ मिलाना. कहते हैं कि दुश्मन उन्हीं लोगों के बीच से पैदा होते हैं, जो आपके अपने होते हैं. जाहिर है कि अगर अपने दुश्मन बन सकते हैं, तो दुश्मन फिर से अपने भी बन सकते हैं. और इसके लिए सिर्फ या तो आपको उन्हें माफ कर देना है, या फिर अपनी गलतियों के लिए उनसे माफी मांग लेनी है.
6. नए दोस्त बनाना. पहल करने में कभी संकोच न करें. अगर कोई आपको अच्छा लगता है तो उसे विश करें. ज्यादातर रिश्तों की शुरुआत एक छोटे से हैल्लो से ही होती है.
7. फ्रेनेमीज, यानि ऐसे दुश्मन जो आपके दोस्त होने का दम भरते हैं, से छुटकारा पाना. इनकी पहचान बहुत ज्यादा मुश्किल नहीं…आपके पीछे आपकी बुराई करना, मौका-बेमौका आपको नीचा दिखाने की कोशिश करना, आपकी हार या अपमान पर आनंदित होना इनके प्रमुख लक्षण हैं.
8. भूले-बिसरे रिश्तों में गर्मजोशी भरना. व्यस्तता के चलते हममें से अधिकतर बहुत सारे अपनों से संपर्क में नहीं रह पाते. समय-समय पर लगभग भुला दिए गए अपनों को काॅल या एसएमएस करते रहें. भले ही वे खुद आपको काॅल न करते रहे हों या आपके एसएमएस का उत्तर न देते हों. यकीन मानिए, इससे आपके ईगो का बहुत ज्यादा नुकसान नहीं होने वाला.
9. रिस्पाॅन्स की परवाह न करना. फेसबुक या ट्विटर पर कम लाइक या कमेंट मिलना हममें से बहुतों को अनावश्यक तनाव से भर देता है. इसे गंभीरता से न लें, सबकी अपनी-अपनी पसंद और पूर्वाग्रह होते हैं. दूसरों की पसंद की परवाह न करते हुए आपको जो पसंद है लिखिए, पोस्ट करते जाइए.
10. कम से कम एक ख्वाहिश पूरी करना. साल दर साल बीतते जाते हैं और हम जो करना चाहते हैं, कर ही नहीं पाते. मकसद बनाइए कि हर साल अपनी ख्वाहिशों की इस लिस्ट में से कम से कम एक प्रविष्टि तो कम करके ही रहेंगे.
11. अपने अनुभवों को दर्ज करना. दिन भर की हर घटना को डायरी में दर्ज करना, भले ही आपको मुनासिब या मुमकिन न लगे, लेकिन अनुभव कुछ साल बाद बहुत कीमती हो जाते हैं.
12. अजनबियों की मदद करना. हर सप्ताह आपको कोई न कोई ऐसा व्यक्ति जरूर मिल जाएगा, जिसे आपकी निःस्वार्थ मदद बहुत काम आ सकती हो. अगर आपको कोई नुकसान न होने वाला हो तो इससे कभी पीछे मत हटिए.
13. परिवार को वक्त देना. परिवार एक ऐसी चीज है, जो आपकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर होनी चाहिए, लेकिन खिसकते-खिसकते सूची में सबसे अंतिम स्थान पर ही पहुंच जाती है. इस प्रवृत्ति से छुटकारा पाइए.
14. किसी एक डर से छुटकारा पाना. हर आदमी कुछ न कुछ चीजों से डरता है. आप भी अपने डर तलाशिये और उनका सामना करने की कोशिश कीजिए. इससे आपमें आत्मबल का संचार होगा.
15. हर हफ्ते एक शाम बिना स्मार्टफोन या इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिताना. बहुत मुश्किल नहीं. याद कीजिए कि इन चीजों के अपने जीवन में प्रवेश से पहले आप कैसे जीते थे. क्या हफ्ते में एक शाम वैसे ही नहीं जी जा सकती?
16. हर महीने कम से कम एक नए व्यंजन का लुत्फ उठाना. मूड बनाने में फूड का योगदान किसी से छिपा नहीं है. और सौभाग्य से हमारे देश में स्वादों की विविधता भी भरपूर है. तो क्यों न हर महीने एक ऐसी चीज का आनंद लिया जाए जो पहले कभी न खाई हो.
17. किसी भी चीज का संग्रह शुरू करना. संग्रह का शौक आपको दिन की सार्थकता का बोध कराता है. इसमें जुड़ने वाली हर चीज आपको एक उपलब्धि की खुशी से भर देती है. यह संग्रह किसी भी चीज का हो सकता है, सिक्के-टिकटों से लेकर रंग-बिरंगी फूल-पत्तियों तक.

  • श्वेता अग्रवाल

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