बातें—मुलाकातें (सुष्मिता सेन)

19 नवंबर को दो ऐसी नारियों का जन्म हुआ है, जिन पर भारतीय जितना मन चाहे गर्व का अनुभव कर सकते हैं, पहली हैं भूतपूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत श्रीमती इंदिरा गाँधी और दूसरी देश के लिए पहला मिस यूनिवर्स टाइटल जीतकर लाने वाली सुष्मिता सेन.

सुष्मिता से मेरी मुलाकात तब हुई थी, जब वह यह टाइटल जीतकर एक साल तक दुनिया भ्रमण करने के बाद स्वदेश लौटी थीं. हर तरफ उनके ही चर्चे थे. उस समय वह दिल्ली के वसंत कुंज स्थित फ्लैट में रहती थीं. मैंने उनके घर का नंबर तलाशा और फोन लगाया. उनकी मम्मी ने फोन उठाया तो मैंने अपना परिचय देते हुए कहा कि मैं सुष्मिता का इंटरव्यू करना चाहता हूँ. उन्होंने एक मिनट होल्ड करने के लिए कहा और फिर सुष्मिता से बात कर, मुझे अगले दिन 11 बजे के आसपास आने के लिए बोला.
हमेशा की तरह मैं तयशुदा वक्त पर उनके घर पहुँच गया. लेकिन उस वक्त सुष्मिता किसी और को इंटरव्यू दे रही थीं, तो मुझे इंतजार करने के अलावा कोई और चारा नहीं था.
मैं वहीं एक चेयर पर बैठ गया. करीब आधा घंटा बीत चुका था. मैं उन दिनों बहुत धैर्यशील हुआ करता था, इसलिए कोई दिक्कत नहीं थी. अचानक मुझे अपने कंधे पर एक नर्म सा स्पर्श महसूस हुआ. मैंने पीछे घूम कर देखा तो ​ब्रह्मांड की सबसे सुंदर लड़की मेरे सामने थी. ताजगी और सौंदर्य से भरपूर.
‘आई एम सॉरी, आपको इंतजार करना पड़ा. आइए, शुरू करते हैं.’ उन्होंने मुस्कराते हुए कहा और किसी को कुछ पीने के लिए लाने के लिए कहा. एक ही मिनट में दो गिलासों में कोल्ड ड्रिंक हमारे सामने आ गए.
हमने सिप करते हुए इंटरव्यू शुरू कर दिया. मैं आक्रमण की पूरी तैयारी से गया था तो बिना उनके लड़की या सर्वसुंदर लड़की होने का लिहाज किए, हर तरह के सवाल दागता गया और वह धैर्य से उनका जवाब देती गईं. केवल एक सवाल पर वह थोड़ा बिदकीं. यह था कि उन्होंने प्रतियोगिता के दौरान महिलाओं और अनाथ बच्चों के लिए काम करने की इच्छा जाहिर की थी. उसके लिए वे आज कितनी प्रतिबद्ध हैं. यह सवाल मैंने हल्का सा मुस्कराते हुए पूछा था कि कहीं उन्हें यह न लगे कि मैं उन पर इल्जाम लगा रहा हूँ.
उन्होंने कहा कि मैं आपसे ज्यादा सीरियस हूँ, क्योंकि आप मुस्करा रहेे हैं.मैंने ऐसा कोई वादा भी तो नहीं किया था, मैं ढिठाई से बोला.इस पर उन्होंने कहा कि इस टाइटल ने उन्हें रोल मॉडल बनाया है, भगवान नहीं. वे अपनी सीमाएं जानती हैं और मिस यूनिवर्स के तौर पर नहीं, बल्कि सुष्मिता सेन के तौर पर जो भी कर सकती हैं वे करेंगी.
इस बात के लिए उनकी तारीफ की जानी चाहिए कि उन्होंने साल 2000 में रिनी और 2010 में अलिसा नाम की बच्चियों को अडॉप्ट किया और साबित किया कि वे अपने कमिटमेंट को लेकर वाकई सीरियस थीं.
एक और चीज, जिसे लेकर वह बहुत सीरियस दिखीं, वह थी सीखने में दिलचस्पी. उन्होंने कहा कि उनकी हिंदी बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है. लेकिन बीच—बीच में वह कभी भी कोई अंग्रेजी शब्द बोलतीं तो मुझसे यह जरूर पूछतीं कि इसे हिंदी में क्या कहते हैं और फिर उसे दोहरातीं. जैसे कि उन्होंने अपने एक जवाब में कहा कि वह मेरी जिंदगी का एक चैप्टर था, यह दूसरा चैप्टर है. फिर बोलीं​ कि पहले बताइए कि चैप्टर को हिंदी में क्या कहते हैं.’अध्याय’ मैंने कहा तो उन्होंने अपना जवाब दोहराया कि वह मेरी जिंदगी का एक अध्याय था, यह दूसरा अध्याय है.
इसके बाद और बहुत सारे सवाल—जवाब हुए, जो यहाँ इंटरव्यू में पढ़ सकते हैं. उनके जवाबों से उनकी जहानत का अंदाजा लगाया जा सकता है, जो बताता है कि वे सूरत ही नहीं, सीरत में भी किसी से कम नहीं हैं.
हमारे बीच दो चीजें कॉमन हैं… इंटरव्यू खत्म होने के बाद मैंने उठते हुए कहा.’क्या?’ उन्होंने हैरानी से मुझे देखा.’एक तो आपकी तरह मेरा निकनेम भी टीटू है और दूसरे हम दोनों के इनिशिअल्स एस.एस.(संदीप सौरभ और सुष्मिता सेन) हैं.’वह अवाक मुझे देखती रह गईं, और फिर जैसे ही उनकी समझ में आया तो उनके चेहरे पर चित्ताकर्षक मुस्कान फैल गई.
आज सुष्मिता का जन्मदिन है. उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं.

  • संदीप अग्रवाल

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