कलम से कमाई

लेखन कार्य एक पार्ट टाइम जॉब ही बन गया लगता है, इसके बावजूद सभी लेखक गण बहुत ही बढ़िया लेखन कार्य करके अपना नाम रोशन कर रहे है, जो निसंदेह गर्व की, अभिमान की बात हो सकती है पर सवाल है क्या एक लेखक सिर्फ़ लेखन से जीवन व्यापन कर सकता है?

सुनने में ही अजीब लगता है, पर ये एक ऐसी सच्चाई है, जो हमे सोचने को मजबूर करती है, क्या लेखक, सिर्फ लेखन से इतनी कमाई कर सकता है, जिससे वो सफलतापूर्वक या कहें सम्मानपूर्वक रह सके, जी सके या घर अच्छे से चला सके या सबसे महत्वपूर्ण सैटिस्फाइड रह सके अपने लेखन कार्य से. सच्चा जवाब तो केवल सच्चा लेखक ही दे सकता है.

Image courtesy: Comfreak(Pixabay)

2016 तक मेरे पास सिर्फ वेदप्रकाश शर्मा जी, अनिल मोहन जी, अमित खान जी और सुरेंद्र मोहन पाठक जी की बुक्स थी या कहें मैं सिर्फ इन्हें ही पढ़ता था.फिर हिंदी नावेल जगत में उगते हुए सूर्य की तरह सूरज पॉकेट बुक्स जैसे कुछ नए प्रकाशन संस्थानों का उदय हुआ जिन्होंने मृतप्राय हिंदी बुक प्रकाशन में एक जान सी डाल दी और फेसबुक, व्हाट्सएप और दूसरे माध्यमों के द्वारा हिंदी बुक प्रकाशन को फिर से सफलतापूर्वक जीवित किया और आज फ्लाईड्रीम्स, बुक कैफ़े, थ्रिलवर्ल्ड, हिंदीयुग्म, शब्दगाथा, फिंगरप्रिंट, रवि पॉकेट, साहित्य विमर्श और अन्य बुक्स पब्लिशर्स के माध्यम से पिछले चार—पांच सालों में अनेकों नए लेखकों का शानदार उदय हुआ है, इन और दूसरे पब्लिशर्स ने बहुत से नए लेखकों की बुक पब्लिश करके हिंदी बुक जगत को कई लेखकों से परिचित कराया है, खुद मेरे पास आज 73 राइटर्स की बुक्स हैं.
इनमे कुछ लेखक जैसे कंवल शर्मा, शुभानंद, संतोष पाठक, चंद्रप्रकाश पांडेय, देवेन पांडेय, देवेंद्र प्रसाद, रमाकांत मिश्र और अन्य सभी बहुत ही अच्छा लेखन कार्य कर रहे हैं, अब सवाल अभी भी वही है क्या सभी लेखक सिर्फ लेखन कार्य ही करते हैं या साथ मे सर्विस / बिजनेस या कोई और कार्य करते है या लेखन सिर्फ पार्ट टाइम करते हैं.
इस सवाल का जवाब जानने के लिए मेरी कुछ राइटर्स से बात हुई या मैंने जानकारी प्राप्त की इस बारे में, तो ज्ञात हुआ अधिकतर आदरणीय लेखकगण कुछ न कुछ और कार्य करते ही है जैसे कोई आईटी, तो कोई एजुकेशन सेक्टर में है तो कोई अन्य कार्य मे व्यस्त है आर्थिक लाभ के लिए.
अब इस स्थिति में लेखन कार्य एक पार्ट टाइम जॉब ही बन गया लगता है, इसके बावजूद सभी लेखक गण बहुत ही बढ़िया लेखन कार्य करके अपना नाम रोशन कर रहे है, जो निसंदेह गर्व की, अभिमान की बात हो सकती है
पर सवाल ये है क्या एक लेखक सिर्फ़ लेखन से जीवन व्यापन कर सकता है या नही, वो भी तब, जब उनके पास बुक पब्लिकेशन के अलावा किंडल, पुस्तकमंडी, ऑडियो बुक, वेब सीरीज़ लेखन जैसे विकल्प मौजूद है.

अगर कोई लेखक एक साल में 2 या 3 या कहें 4 बुक ही लिख पाता है जो जवाब शायद ना में ही हो, पर अगर कोई लेखक जैसे श्री संतोष पाठक जी जिन्होंने एक साल में 10 किताबें लिखी और सफलतापूर्वक पब्लिश की ना केवल किंडल पर, बल्कि बुक फॉरमेट पर भी, ये काम उन्होंने 2020 में किया और अब फिर 2021 में कर दिखाया, वो भी क्वालिटी कहें या अपने स्तर को या कहें उच्च स्तर को बनाये रखते हुए.
संतोष जी ने कोरोना काल का भरपूर फायदा उठाया, जिसके लिए वो बधाई के पात्र है, पर क्या दूसरा कोई लेखक ऐसा कर पाया शायद नही. हो सकता किसी और लेखक ने भी किया हो जिसका मुझे पता न चला हो.
अगर एक लेखक कर सकता तो दूसरा क्यों नही, यहां एक बात ध्यान देने की है कि हर लेखक की अपनी परिस्थिति होती है जिन्हें लेखक खुद बेहतर जानता है. इसलिए हर किसी के लिये लेखन को फुलटाइम जॉब बनाना शायद सम्भव नहीं है.
आज के जमाने मे लेखन भले ही पार्ट टाइम जॉब बन गया हो पर नए और पुराने सभी हिंदी लेखक इतना अच्छा लिख रहे हैं कि खुद मेरे पास दो तीन सालों में 500 से ज्यादा बुक्स जमा हो गई है.
लेखकगण अच्छा लिखते रहें और हमारा मनोरंजन करते रहे.

10 thoughts on “कलम से कमाई

  1. BRAJESH KUMAR SHARMA

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    बहुत सुंदर लेख। हिंदी लेखन की वर्तमान स्थिति पर बहुत अच्छी तरह प्रकाश डाला है आपने। साधुवाद।

  2. पाठकों के बीच लेखक भी अंग्रेजी मानसिकता के शिकार है, यह अनुवांशिक है। अंग्रेजी बाजारू भाषा है इसलिए उसमे अच्छा पैसा भी है। हिंदी का बाजार पहले भूत बड़ा था, और आज फिर से बढ़ने लगा है। आज हम यह नहीं कह सकते की सिर्फ अंग्रेजी का बाजार बड़ा है। हमें बस और अधिक लेखक पैदा करने होंगे। और बेहतर लिखना होगा।

  3. नृपेंद्र शर्मा

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    हिंदी लेखक अच्छा लिख रहे हैं, और कुछ लेखक नाम और पैसा दोनों पा भी रहे हैं। फिर भी अभी इस क्षेत्र में संभावनाएं खोजी जानी बाकी हैं।
    आपके लेख से काफी लोगों को ऑडियो और अन्य प्लेटफार्म के लिखने की प्रेरणा मिलेगी।

  4. अति उत्तम लेख।
    नामी लेखकों को विरत कर देखा जाए तो कलम के सहारे शायद ही कोई लेखक इतना अर्न कर सके कि परिवार का बोझ उठा सके।

    हादी हसन

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