महंगाई बढ़ी तो महंगा होगा कर्ज! एसबीआई ने RBI की दरों पर जताई बड़ी आशंका
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) रिसर्च की हालिया 'इकोव्रैप' रिपोर्ट में देश की आर्थिक स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल के ऊंचे दामों के दबाव के चलते भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आगामी महीनों में अपनी नीतिगत दरों में इजाफा कर सकता है।
नीतिगत दरों में हो सकती है बढ़ोतरी
एसबीआई रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, आरबीआई अक्टूबर और दिसंबर की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठकों में नीतिगत दरों में 25-25 आधार अंकों की वृद्धि कर सकता है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह संभावित दर वृद्धि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों से पूरी तरह स्वतंत्र होगी, जैसा कि आरबीआई ने वर्ष 2022 में भी अपनाया था। भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुकी हैं और आने वाले दिनों में इसके 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका जताई गई है।
बढ़ती महंगाई और व्यापक प्रभाव
रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि देश में महंगाई का दायरा अब अधिक व्यापक होता जा रहा है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में उच्च भार रखने वाली वस्तुओं का दायरा जनवरी 2026 के 22 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई में 53 प्रतिशत तक पहुंच गया है। प्राकृतिक गैस, कच्चा पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और पेय पदार्थों जैसे क्षेत्रों में इनपुट लागत तेजी से बढ़ने लगी है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
बॉन्ड यील्ड और तरलता पर संभावित असर
एसबीआई रिसर्च का मानना है कि महंगाई को जड़ जमाने से रोकने के लिए अक्टूबर में ही नीतिगत कदम उठाना जरूरी है। इस स्थिति के चलते सरकारी बॉन्ड यील्ड पर दबाव लगातार बना रहेगा और बेंचमार्क 10-वर्षीय यील्ड 7.15 प्रतिशत या उससे ऊपर जा सकती है। इसके अलावा, त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने और मजबूत क्रेडिट ग्रोथ के कारण बैंकिंग प्रणाली में मौजूद मौजूदा अतिरिक्त तरलता के अगले तीन से चार महीनों में कम होने की संभावना है।
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