31 मार्च या 01 अप्रैल...! कब शुरू हो रहा चैत छठ? जानें संतान प्राप्ति के लिए क्या करें उपाय
साल भर में कुल दो बार छठ महापर्व मनाया जाता है. एक चैत्र के महीने में दूसरा कार्तिक के महीने में. छठ पूजातो वैसे पूरे देश भर में मनाया जाता है, लेकिन विशेष कर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और बंगाल में इस पर्व को पुरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. सभी पर्व त्यौहार में छठ पूजा ही एक ऐसा पर्व है, जिसे महापर्व के रूप मे मनाया जाता है. छठ महापर्व में प्रत्यक्ष रूप से भगवान सूर्य की आराधना की जाती है. छठ पूजा में शुद्धता का बेहद खास ध्यान रखा जाता है,
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य?
चैती छठ मेें माता षष्ठी और भगवान सूर्य देव की आराधना की जाती है. चैती छठ के दौरान शुद्धता का भी बेहद खास ख्याल रखा जाता है. छठ पूजा पुरे चार दिनों तक चलता है. नहाय खाय के साथ पूजा आरम्भ होता है. दूसरे दिन खरना का प्रसाद ग्रहण करना चाहिए, तीसरा दिन डूबते सूर्य को अर्घ दिया जाता है और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ देने के साथ ही पर्व का समापन हो जाता है.
कब से शुरु हो रही है चैती छठ?
ज्योतिषाचार्य बताते है चेती छठ पूजा का आरम्भ 01 अप्रैल नहाय खाय के साथ हो रहा है और 02 अप्रैल खरना का प्रसाद और 03 अप्रैल डूबते सूर्य को अर्घ और 04अप्रैल उगते सूर्य को अर्घ के साथ हीं इस महापर्व का समापन हो जाएगा.
चैती छठ का है खास महत्व
ज्योतिषाचार्य बताते है की छठ महापर्व के दौरान जो व्रती है. वह 36 घंटे बिना अन्न जल ग्रहण किये उपवास पर रहती हैं. इसके साथ ही छठ पूजा के दौरान अगर व्रत रखकर पुरे शुद्ध मन से भगवान सूर्य को अपनी मनोकामना लिए अर्घ प्रदान करें, तो बड़े से बड़े रोग, दोष, कष्ट के साथ हीं सभी मनोकामना पूर्ण होती है. इसके साथ हीं निःसंतान दम्पति अगर व्रत रखकर भगवान सूर्य और माता षष्ठी की आराधना करें, तो उनको संतान की भी जल्द प्राप्ति होती है.
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