गाजीपुर में होली पर युवा ने लावारिस लाशों के साथ मनाई होली, 2000 शवों का किया अंतिम संस्कार
इस साल होली का त्योहार जहां लोग अपने परिवार रिश्तेदार मित्र और सगे संबंधियों के साथ मनाया. वहीं, गाजीपुर का एक युवा लावारिस लाशों के साथ होली का पर्व मनाते नजर आया. दरअसल, गाजीपुर के कुंवर वीरेंद्र सिंह जो लावारिसों के वारिस कहे जाते हैं वो अब तक 2000 से ऊपर लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं.
होली के दिन भी त्योहार होने के बावजूद लावारिस शव के अंतिम संस्कार करने से उन्होंने मुंह नहीं मोड़ा. अपने संकल्प के तहत चेहरे पर अबीर गुलाल रंग लगे होने के बावजूद मॉर्चरी हाउस पहुंचकर लावारिस का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसका अंतिम संस्कार पूरे हिंदू रीति रिवाज के अनुसार किया.
होली के दिन जब पूरे देश में होली और जुम्मा को संपन्न कराने की कवायद चल रही थी. इन सबके बीच गाजीपुर में ऐसी मौत जिनका कोई बारिश नहीं और ऐसे लावारिसों को अंतिम संस्कार उनके धर्म के अनुसार करने की सबसे बड़ी चुनौती को हमेशा से पूरा करते आ रहे कुंवर वीरेंद्र सिंह ने एक बार फिर से पूरा कर मानवता का संदेश दिया. दरअसल पूरे जनपद में लावारिस शव के मिलने का क्रम लगातार जारी रहता है और उस शव का अंतिम संस्कार चुनौती होता है. लेकिन कुंवर वीरेंद्र सिंह इस चुनौती को सालों पहले स्वीकार कर लगातार ऐसे शव का अंतिम संस्कार करते आते हैं.
होली के दिन भी वह अपने दोस्त मित्रों के साथ यह पर्व मना रहे थे, लेकिन जैसे ही शाम हुआ वह अपने दोस्त मित्र और परिवार को छोड़कर एक बार फिर अपने पुरानी राह पर चलते हुए सीधे मेडिकल कॉलेज के मर्चरी हाउस पहुंचे. वहां पर लावारिस शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसे शमशान घाट ले जाकर वहां के स्थानीय लोगों और पुलिस कर्मियों की मदद से अंतिम संस्कार किया.
भीख मांगने वाले शख्स की मौत
जानकारी के अनुसार, भीख मांगने वाले एक शख्स की होली से ठीक दो दिन पहले मौत हो गई थी. उसका अंतिम संस्कार करने वाला कोई नहीं था. जब कुंवर वीरेंद्र सिंह को इसकी भनक लगी तो वह होली मनाने के बाद सीधे मॉर्चरी हाउस पहुंचे. उन्होंने फिर कांस्टेबल बिंदा प्रसाद एवं होमगार्ड अंबिका प्रसाद कुशवाहा के सहयोग से शव को शमशान घाट पर पहुंचाया. फिर हिंदू रीति रिवाज के अनुसार उसका अंतिम दाह संस्कार किया. उसके अंतिम संस्कार में गोपाल कसौधन, वाहन चालक बबलू एवं जमुना राजभर ने भी अपना सहयोग दिया.
रोज आते हैं श्मशान घाट
कुंवर वीरेंद्र सिंह के लिए यह कोई नया काम नहीं है. बल्कि कोई ऐसा दिन नहीं होता जब वह शाम 5:00 से लेकर रात 8:00 बजे तक शमशान घाट पर ना मिलते हों. कारण की पूरे जनपद जिसमें रेलवे से कटे हुए लोगों के शव भी शामिल होते हैं. उन सभी शव को 72 घंटे तक मर्चरी रूम में रखकर परिजनों का इंतजार करने के बाद उसका अंतिम संस्कार कराते हैं. ऐसे में कई बार 72 घंटे तक शव रखने के दौरान कई के परिजन भी पहुंचकर शव की पहचान करते हैं और उन शवों का भी अंतिम संस्कार परिजनों के द्वारा कराने में कुंवर वीरेंद्र सिंह अपनी पूरी सहभागिता निभाते हैं.
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