विशेष पिछड़ी जनजाति के कमार बसाहटों में जनमन योजना से पहुंची जलधार
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में केंद्रीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इनमें से एक प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत धमतरी जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में बसे विशेष पिछड़ी जनजाति के कमार परिवारों को अब साफ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।
धमतरी जिले में सुदूर वनांचलों और घने जंगलों में बसने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति कमारों के 92 ग्राम पंचायतों के 118 गांवों की 130 बसाहटों में एक हजार 981 परिवार निवासरत हैं। यहां रहने वाले लोगों को पीने के लिए साफ पानी की व्यवस्था अपने घरों से दूर जंगलों, तालाबों या पोखरों से करना पड़ता था। कई बसाहटें पानी के लिए जंगलों में बहने वाले मौसमी नदी-नालों पर निर्भर थीं। पानी के लिए बहुत दूर तक जाने में लगने वाले शारीरिक श्रम, गर्मी-बरसात-ठंड के मौसम में होने वाली असुविधाओं के साथ-साथ पोखरों-तालाबों-नालों के अशुद्ध पानी के कारण होने वाली बीमारियों से भी लोगों को जूझना पड़ता था। सुदूर जंगलों में पैदल चलते रहने से सांप-बिच्छुओं के साथ-साथ जंगली जानवरों के हमले का डर भी हमेशा लगा रहता था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा अनुसार विशेष पिछड़ी जनजातियों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने और उनके रहवास क्षेत्र को विकसित करने के लिए पीएम जनमन अभियान धमतरी जिले में शुरू किया गया। इस अभियान के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति कमार क्षेत्रों का समग्र विकास करने की योजना तैयार की गई। इन कमार बसाहटों में पीने का साफ पानी घर-घर पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन के तहत रेट्रोफिटिंग, सिंगल विलेज व समूह जल प्रदाय योजनाओं को स्वीकृत किया गया। योजनाओं के अनुसार चयनित गांवों में हैण्डपम्प, ट्यूबवेल जैसे जलस्त्रोत बनाए गए। गांवों में आरसीसी ओवहरहेड पानी टंकियों का निर्माण किया गया। इन पानी टंकियों से बसाहटों के हर घर में पाईप लाईन बिछाकर नल कनेक्शन दिए गए। जिन गांवों-बसाहटों में बिजली की व्यवस्था नहीं थी, वहां सौर ऊर्जा चलित पम्प लगाकर पानी की आपूर्ति घर-घर में लगे नलों में की गई। आज पीएम जनमन योजना के माध्यम से कमार बसाहटों के एक हजार 958 घरों में नलों से शुद्ध पानी पहुंचाया जा रहा है।
पानी लाने के लिए दूर जंगलों में जाने की मजबूरी अब खत्म होने से उनका शरीरिक श्रम बचा ही है, इसके साथ ही आने-जाने में लगने वाले समय का उपयोग वनोपज संग्रहण, घर-गृहस्थी संभालने, बच्चों की देखरेख आदि में लगा रहे हैं। कुछ कमार घरों में अब बाड़ी भी लगने लगीं हैं, जिससे उन्हें अपने घर में ही स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जियां मिल रहीं हैं।
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