मोहन यादव बोले: ‘PWD पर खूब गालियाँ पड़ती हैं, लेकिन कर्मों का हिसाब तो सबको मिलेगा
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पीडब्ल्यूडी विभाग के इंजीनियरों को नसीहत देते हुए कहा "सरकार का पैसा है. लेकिन सरकार के पैसे के अलावा हमारे अंदर आत्मा भी है, जिसे अच्छे और बुरे का भी जवाब देना है. हमें तो परमात्मा को भी जवाब देना है, जब जाएंगे तो बताना होगा कि यह जो किया है, उसके जवाबदार हम ही हैं. हमारे द्वारा किया गया काम, हमको भी अच्छा लगना चाहिए." मुख्यमंत्री भोपाल के रवीन्द्र भवन में पीडब्ल्यूडी विभाग के पर्यावरण से समन्वय पर केंद्रित संगोष्ठी सह प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे.
मुख्यमंत्री ने बताया इंजीनियर शब्द का मतलब
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा "इंजीनियर शब्द का अर्थ ही है विज्ञान, गणित. जो इन दोनों में समान अधिकार रखे वहीं इंजीनियर है. हमारे अपने कई निर्माण की कई संरचनाएं हैं, जो आश्चर्यचकित करती हैं. वन क्षेत्र से सड़क निकली तो ब्रिज बनाकर निकाल दी. यह नया प्रयोग हुआ है. इसमें नीचे से टाइगर निकल रहे हैं, ऊपर से सड़क निकली है. इस तरह के प्रयोग पर्यावरण को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं."
समझदार को इशारा काफी होता है
मुख्यमंत्री ने कहा "कांक्रीट की मात्रा, लोहे की मात्रा, सीमेंट आदि की गुणवत्ता आदि भी संकट का विषय होता है. वैसे सरकार की मर्यादा होती है और मुख्यमंत्री की ज्यादा होती है, लेकिन समझदार को इशारा काफी होता है. मैं जो बोलना चाहता हूं वो आप समझ गए होंगे. पर्यावरण के साथ जोड़कर निर्माण काम करने का संकल्प के साथ आगे बढ़ें. इस तरह के संकल्प के साथ चलने से हमारा ध्येय भी दिखाई देता है."
अपना रुपया सवा रुपए में तो चलाना सीखो
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा "मिट्टी की जैसे प्रकृति है, उसके हिसाब से निर्माण कार्य करें. यह अलग बात है कि स्टीमेट में थोड़ा फर्क पडता है, लेकिन मत बनाओ लंबा-चौड़ा, थोड़ा छोटा बना दो. अपना रुपया सवा रुपया में तो चलना चाहिए. मैं तो सुनने के लिए आया था. पीडब्ल्यूडी को बहुत गालियां पड़ती हैं. काम करते-करते, मैं समझता हूं कि इस भाव की दृष्टि से भी हम इसको देखें. आपकी अपनी सीमाएं होती हैं, लेकिन इस दायरे को खोलने के लिए यह कार्यशाला महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी."
पीडब्ल्यूडी मंत्री ने लोकपथ एप का महत्व बताया
पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा "हमने प्रदेश के इंजीनियरों को तेलंगाना भेजा. वहां जाकर इंजीनियरों ने बताया कि जिस सड़क पर खड़े थे, वह 7 साल पहले बनी थी और आज भी ऐसा लगता है कि वह आज ही बनी हो. सड़कों की गुणवत्ता को लेकर रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री को दी थी. इस रिपोर्ट के बाद ही तय किया गया था कि डामर सिर्फ सरकारी संस्थानों से ही खरीदा जाएगा. हर किलोमीटर पर रीचार्ज बोर बनाने का निर्णय लिया. लोकपथ एप बनाया गया. इस एप को लेकर विभाग को कई सवाल थे. लेकिन इस एप की सफलता है कि इसका सवाल कौन बनेगा करोड़पति तक में पूछा गया."
लोकपथ एप पर समय घटेगा, 4 दिन में होगा सुधार
पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा "अब निर्णय लिया गया है कि लोक पथ में अभी 7 दिन समय सीमा था, लेकिन अब इसे 4 दिन का समय निर्धारित किया जा रहा है. एनएचएआई तो शिकायत के बाद तो 48 घंटे में गड्ढे भरने का काम कर रहा है. मध्यप्रदेश में कैपिसिटी बिल्डिंग का ऐसा माड्यूल तैयार कर रहे हैं, जो पूरे देश के किसी राज्य में नहीं होगा, ताकि आने वाले समय में विभाग के किसी भी कर्मचारी की कार्यक्षमता पर उंगली न उठ सके. अगले 1 साल के अंदर पूरे देश में मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग अपनी अलग भूमिका के लिए जाना जाएगा."
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