महाकाल की राजसी सवारी पर हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा
उज्जैन । उज्जैन में आज बाबा महाकाल की अंतिम राजसी सवारी निकली गई। भगवान महाकाल राजसी ठाठ-बाट के साथ आज नगर भ्रमण पर निकले। महाकाल की पालकी के ऊपर मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर और 10 ड्रोन से पुष्पवर्षा की गई है। महाकाल की एक झलक पाने के लिए लोगों का हुजूम सड़कों पर उमड़ पड़ा। महाकालेश्वर मंदिर से शाम 4 बजे शुरू हुई बाबा की सवारी नगर के प्रमुख मार्गो से होती हुई शिप्रा नदी पहुंची। रामघाट पर जलाभिषेक और पूजन के बाद बाबा की सवारी वापस मंदिर लौट गई।
बाबा महाकाल का प्रांगण स्वर्ग लोक जैसा
बाबा महाकाल की सवारी निकलने से पहले मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भगवान का पूजन किया। इस मौके पर भव्य सजावट को देखकर मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा महाकाल का प्रांगण स्वर्ग लोक जैसा मालूम पड़ रहा है। श्रावण-भाद्रपद माह में ये बाबा महाकाल की छठी सवारी है।
गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया
मान्यता है कि भगवान महाकाल सवारी के रूप में अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं। वहीं अपने राजा की एक झलक पाने के लिए प्रजा भी घंटो तक सड़क के किनारे इंतजार करती है। शाम को पूजन के बाद राजा महाकाल को चांदी की पालकी में बैठाकर मंदिर से बाहर लाया गया। मंदिर से निकलते ही पुलिस बैंड और जवानों के द्वारा बाबा की सवारी को गार्ड आफ ऑनर दिया गया। सवारी के आगे घोड़ा, बैंड, पुलिस टुकड़ी और भजन मंडलियां चल रहीं थीं. गाजे-बाजे के साथ निकली सवारी का सफर लगभग आठ किलोमीटर का है।
राजसी सवारी में बाबा महाकाल ने 6 स्वरूपों में भक्तों को दर्शन दिए
बाबा महाला के 6 स्वरूपों के भक्तों ने दर्शन किए। श्री महाकालेश्वर भगवान (श्री चंद्रमोलीश्वर) की प्रमुख पालकी, श्री शिव-तांडव जी, श्री उमा महेश स्वरुप, श्री होलकर मुखारविंद, श्री सप्तधान मुखारविंद के पश्यात श्री मनमहेश स्वरुप हाथी पर विराजित दिखे।
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