नान घोटाला केस में सरेंडर के लिए पहुंचे थे आलोक शुक्ला, तकनीकी कारणों से टला मामला
रायपुर: वर्ष 2015 में डॉ. रमन सरकार के दौरान हुए नान घोटाले में आरोपित बनाए गए सेवानिवृत्त आइएएस डॉ.आलोक शुक्ला ईडी के विशेष अदालत में दूसरे दिन शुक्रवार को भी सरेंडर करने पहुंचे। लेकिन उनका सरेंडर नहीं हुआ। कोर्ट ने सरेंडर आवेदन पेश करने पर मामले में 22 सितंबर को सुनवाई नियत की है।
इससे पहले गुरुवार को डॉ.शुक्ला कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचे थे, जिस पर कोर्ट ने सरेंडर करवाने से इनकार कर उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया था कि अभी तक सुप्रीम कोर्ट का आर्डर अपलोड नहीं हुआ है। पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी लेकर आएं, तब सरेंडर की प्रक्रिया पूरी हो पाएगी।
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गौरतलब है कि 16 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. शुक्ला और अनिल टूटेजा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के साथ दो सप्ताह की कस्टोडियल और ज्यूडिशियल रिमांड का निर्देश दिया है। इसके बाद ईडी की टीम ने भिलाई के तालपुरी और हुडको में डॉ. शुक्ला और ट्रांसपोर्टर सुधाकर राव के दस से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी। तब से दोनों की गिरफ्तारी की चर्चा चल रही है।
अनिल टूटेजा और अनवर ढेबर पहले से जेल में
इसके पहले ईओडब्ल्यू कस्टम मिलिंग घोटाले में मुख्य आरोपित पूर्व आइएएस अनिल टूटेजा और अनवर ढेबर को गिरफ्तार कर चुकी है। दोनों इस समय शराब और कस्टम मिलिंग घोटाले में जेल भेजे गए है। उक्त दोनों से पूछताछ में मिले इनपुट्स के आधार पर ही ईडी ने भिलाई में छापेमारी की।
कस्टम मिलिंग घोटाले के आरोपी जमानत पर बाहर
जांच एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि पूछताछ में कई अधिकारियों और मिलर्स की मिलीभगत कर कमीशनखोरी करने के अहम सुराग मिले हैं। इस छापेमारी के बाद आलोक शुक्ला पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। कस्टम मिलिंग घोटाले में जेल भेजे गए मार्कफेड के तात्कालीन एमडी मनोज सोनी और राइस मिल एसोसिएशन के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर को सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर रिहा किए गए है।
वर्ष 2015 में उजागर हुए नान घोटाले में एसीबी और ईओडब्ल्यू ने नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के 20 परिसरों पर छापे मारा था। इस दौरान 3.64 करोड़ रुपये नगद और घटिया गुणवत्ता का चावल-नमक जब्त हुआ था। मामले में पू्र्व आइएएस आलोक शुक्ला, अनिल टुटेजा समेत कई अधिकारी आरोपित बनाए गए हैं।
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