ईरानी विद्रोह से क्या तीसरे विश्व युद्ध की नींव तैयार हो गई है? रुस-चीन भी हैं तैयार
तेहरान। ईरान में विरोध प्रदर्शन तेज होते जा रहे हैं। ईरानी रियाल की भारी गिरावट से शुरू हुए ये प्रदर्शन अब इतने बड़े स्तर पर पहुंच गए हैं कि पूरी दुनिया और खासतौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप भी इसमें इनवॉल्व हो रहे हैं। आशंका ये है कि तेल का खेल बिगड़ते देखकर चीन और रूस भी इस बार शायद चुप रहेंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या तीसरे विश्व युद्ध की नींव तैयार हो गई है? मौजूदा हालात और बिगड़े तो क्या ईरान की सड़कों पर खून-खराबा होगा? फिर संकट की घड़ी में ईरान के साथ कौन-कौन से देश खड़े होंगे?
ईरान ने अपनी ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को मैक्सिमम अलर्ट पर रखा है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने आदेश दिया है कि आईआरजीसी पूरी तरह तैयार रहे। इस अलर्ट को जून 2025 में इजराइल के साथ हुई 12 दिनों की जंग से भी ज्यादा गंभीर माना है। इस तनाव के बीच सोशल मीडिया पर इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे ईरान की जनता से आजादी के लिए लड़ने की अपील करते नजर आ रहे हैं। इसी बीच ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने भी जनता से जोरदार विरोध प्रदर्शन करने की अपील की है। उन्होंने तेल, गैस और ऊर्जा क्षेत्र के कर्मचारियों से देशव्यापी हड़ताल करने और बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है।
ईरान में भू-राजनीतिक तनाव के बीच चीन, रूस और ईरान के युद्धपोत दक्षिण अफ्रीका पहुंच चुके हैं। यहां तीनों देशों के बीच संयुक्त नौसैनिक अभ्यास हो रहा है। माना जा रहा है कि रूस आईआरजीसी को आधुनिक हथियारों, एयर डिफेंस मिसाइलों और रडार सिस्टम की ट्रेनिंग दे सकता है।
ईरान का सबसे बड़ा युद्धपोत मकरान, चीनी और रूसी जहाजों के साथ मौजूद है। दक्षिण अफ्रीका की रक्षा सेना का कहना है कि इन अभ्यासों से आपसी सैन्य तालमेल और अनुभव साझा करने में मदद मिलेगी। ईरानी दूतावास ने एक्स पर बयान जारी कर अमेरिका पर मनोवैज्ञानिक युद्ध, सैन्य हस्तक्षेप की धमकी, झूठी खबरें फैलाने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि ये सभी कदम संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।
इस बीच अमेरिकी वायुसेना का सी-17 ग्लोबमास्टर विमान जर्मनी से मध्य पूर्व की ओर उड़ता देखा गया है। यह विमान भारी हथियार, टैंक और सैनिक ले जाने में सक्षम है। कुछ रिपोर्टे्स में ये भी कहा गया कि अमेरिकी केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान फारस की खाड़ी और इराकी हवाई क्षेत्र में फ्यूल भरते देखा गया है। ऐसा नहीं है कि वो अमेरिका ही इस तैयारी में लगा हुआ है ईरान के समर्थन में चीन भी खुलकर आ गया है उसने कहा है कि वह ईरान की संप्रभुता की रक्षा के लिए आर्थिक, खुफिया, तकनीकी या सैन्य मदद देने को तैयार है। कई रक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि चीन बाहरी ताकतों के समर्थन से फैलाए जा रहे अस्थिरता के खिलाफ ईरानी सरकार के साथ खड़ा है। रिपोर्ट्स कह रही हैं कि चीन वेनेजुएला के बाद अपने एक और तेल के स्रोत को यूं ही नहीं जाने देगा।
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