जब आप टीम से बाहर होते हैं तो…; एक साल बाद टीम में वापसी करने पर छलका रवि बिश्नोई का दर्द
भारतीय स्पिनर रवि बिश्नोई का मानना है कि एक साल की कड़ी मेहनत, आत्मनिरीक्षण और अपनी गेंदबाजी की लेंथ में नियंत्रण बनाए रखने पर काम करने से उनके प्रदर्शन में सुधार हुआ और वह राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने में सफल रहे। बिश्नोई का पिछले आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन नहीं रहा था। इसके बाद लखनऊ सुपर जायंट्स ने उन्हें रिलीज कर दिया था लेकिन पिछली नीलामी में राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें 7.20 करोड़ रुपये में खरीदा।न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में शानदार प्रदर्शन करने वाले बिश्नोई ने मैच के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘पिछले एक साल में मैंने अपनी लेंथ पर काम किया है क्योंकि पिछले आईपीएल सत्र में मेरा प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा था। पिछले सत्र में मेरा अपनी लाइन और लेंथ पर मेरा ज्यादा नियंत्रण नहीं था।’’उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मैंने स्टंप्स पर 5-6 मीटर की लेंथ पर गेंदबाजी करने की पूरी कोशिश की, क्योंकि उस लेंथ पर की गई गेंद पर शॉट लगाना मुश्किल होता है।’’इस 25 वर्षीय लेग स्पिनर ने इससे पहले पिछले साल फरवरी में इंग्लैंड के खिलाफ भारत के लिए आखिरी मैच खेला था। वह न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए टीम में शामिल नहीं थे। उन्हें स्पिन ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर को चोट लगने के बाद ही टीम में जगह मिली।बिश्नोई ने तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में मिले मौके का पूरा फायदा उठाया और चार ओवर में 18 रन देकर दो विकेट लिए।उन्होंने कहा, ‘‘जब आप टीम से बाहर होते हैं तो काफी मुश्किल होता है। यह भारतीय टीम बहुत मजबूत है और इसमें जगह बनाना आसान नहीं है। इसलिए आपको सीमित अवसर मिलते हैं। मेरे लिए यह अच्छा है कि मुझे अपनी गेंदबाजी पर काम करने का मौका मिला। मैंने घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन किया और उससे मुझे वापसी करने में मदद मिली।’’बिश्नोई ने कहा, ‘‘एक गेंदबाज के लिए टी20 मैच हमेशा मुश्किल होता है। जस्सी भाई (बुमराह) ने अच्छी गेंदबाजी की, हार्दिक भाई (पांड्या) ने अच्छी गेंदबाजी की, हर्षित (राणा) ने भी शुरुआत में विकेट लिया। अगर हम शुरुआत में ही दो-तीन विकेट ले लेते हैं, तो बल्लेबाजी करने वाली टीम के लिए मुश्किल हो जाती है।’’उन्होंने स्वीकार किया कि जब उन्हें इस मैच में खेलने का मौका मिला तो वह पहले थोड़ा नर्वस थे।बिश्नोई ने कहा, ‘‘मुझे आज अवसर मिला और शुरू में मैं थोड़ा नर्वस था लेकिन साथ ही उत्साहित भी था। आपको जब भी मौका मिलता है तो आपको अच्छा प्रदर्शन करना होता है इसलिए घबराहट और उत्साह दोनों ही होते हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अच्छी लेंथ पर गेंदबाजी करने की कोशिश की। अगर गेंद उस लेंथ पर अच्छी गति से गिरती है तो शॉट मारना बहुत मुश्किल होता है। ऐसा नहीं है कि मुझे 100 किमी प्रति घंटे से अधिक या 100 किमी प्रति घंटे से कम की रफ्तार से गेंदबाजी करनी है। मैं उस दिन जैसा महसूस करता हूं, वैसी ही गेंदबाजी करता हूं।’’
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