यहां गुप्त रूप से जंगल में विराजमान है तंत्र की देवी, मंदिर के पेड़ों पर गड़े मिलते हैं नींबू और कीलें
19 मार्च दिन गुरुवार से चैत्र नवरात्रि की शुरू होने वाली हैं, हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है. नवरात्रि के नौ दिन देश भर में मां भगवती के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है और हर कोई मां की भक्ति में डूबा रहता है. नौ दिन मां के शांत से लेकर उग्र रूपों की पूजा होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जंगलों में गुप्त रूप से ऐसी मां विराजमान हैं, जिन्हें तंत्र की देवी कहा जाता है? हम बात कर रहे हैं मसान मेलडी माता की, जो उज्जैन के जंगलों में बसी हैं और गुजरात की रक्षक के रूप में पूजी जाती हैं. जंगलों के बीच में स्थित माता का यह मंदिर बेहद चमत्कारी माना जाता है. आइए जानते हैं माता के इस मंदिर के बारे में..
भक्तों को अद्भुत शक्ति का अहसास
उज्जैन के भैरवगढ़ के पास जंगलों में भक्तों को अद्भुत शक्ति का अहसास होता है. भक्तों का मानना है कि यहां आकर मां के होने का अहसास होता है. जंगलों में गुप्त रूप से विराजमान मां मेलडी का मंदिर लोकप्रिय मंदिरों में से एक है. मां मेलडी को मुख्यत: गुजरात की देवी माना जाता है. आज भी गुजरात के ग्रामीण इलाकों में बसे लोग मसान मेलडी को गुजरात की रक्षिका के रूप में पूजते हैं.
मंदिर तक पहुंचने का रास्ता सरल नहीं
उज्जैन के भैरवगढ़ के जंगलों में बने मां मसान मेलडी का नजारा अद्भुत होने के साथ-साथ डरावना भी है, क्योंकि मंदिर तक पहुंचने का रास्ता सरल नहीं है. रास्ते में लंबे-लंबे बांस का जंगल है और रास्ते में पड़ने वाले पेड़ तंत्र के साक्ष्य हैं. पेड़ों पर बड़ी कीलें, नींबू, और कपड़े से बनी गुड़ियां लटकी दिखती हैं. माना जाता है कि अघोरी रात के समय मां की तपस्या करते हैं और अपनी तंत्र विद्या की सिद्धि के लिए अनुष्ठान भी करते हैं. मसान मेलडी के मंदिर की बात करें तो देखने में मंदिर बहुत छोटा है, जो टीन के शेड में बना है, लेकिन वहां मां की चरण पादुका हैं. चरण पादुका के साथ मां की छोटी सी धातु की प्रतिमा भी मौजूद है.
भक्त की मनोकामना हो जाती हैं पूरी
दर्शन करने आए भक्त मां के चरणों पर तेल या परफ्यूम चढ़ाते हैं. माना जाता है कि मां के दर्शन मात्र से ही भक्त की मनोकामना पूरी हो जाती है, लेकिन ध्यान देने वाली बात यह भी है कि मां के मंदिर में सूरज ढलने के बाद आना मना है. स्थानीय मान्यताओं की मानें तो सूरज ढलने के बाद मां की साधना तांत्रिक करते हैं, तो ऐसे में मंदिर में आम लोग जाने से परहेज करते हैं.
इस तरह किया माता ने असुर का अंत
मां मसान मेलडी मां दुर्गा का ही स्वरूप हैं, जिन्होंने असुर अमरुवा को अंत किया था. माना जाता है कि असुर अमरुवा मां पार्वती के क्रोध से बचने के लिए गाय के कंकाल में छिप गया था. मां पार्वती ने अपनी पवित्रता के चलते अमरुवा को मारना उचित नहीं समझा और अपने हाथ मलकर मां मसान मेलडी को उत्पन्न किया. तब मां मेलडी ने असुर अमरुवा का अंत कर बुराई का विनाश किया.
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