दाऊद का करीबी सलीम डोला गिरफ्तार, मेफेड्रोन तस्करी की साजिश नाकाम
नई दिल्ली। भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के बेहद करीबी और भरोसेमंद गुर्गे सलीम डोला को दबोचकर 'डी-कंपनी' के वैश्विक ड्रग नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। डोला भारत में सिंथेटिक ड्रग 'मेफेड्रोन' की एक बहुत बड़ी खेप खपाने और अपना साम्राज्य फैलाने की फिराक में था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, उसकी गिरफ्तारी न केवल दाऊद सिंडिकेट के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका है, बल्कि इससे देश के युवाओं को नशे के दलदल में धकेलने वाली एक अंतरराष्ट्रीय साजिश का भी पर्दाफाश हुआ है।
सस्ता नशा और युवाओं को निशाना बनाने की साजिश
सलीम डोला ने भारत के नशा बाजार में सेंध लगाने के लिए मेफेड्रोन (जिसे 'म्याऊ-म्याऊ' या 'व्हाइट मैजिक' भी कहा जाता है) को अपना मुख्य हथियार बनाया था। कोकीन जैसे महंगे नशे के मुकाबले मेफेड्रोन की बेहद कम कीमत और इसकी अत्यधिक लत लगाने वाली प्रकृति ने इसे युवाओं के बीच खतरनाक रूप से लोकप्रिय बना दिया है। आंकड़ों के अनुसार, अकेले मुंबई में दस में से आठ ड्रग व्यसनी इसी घातक पदार्थ का सेवन कर रहे हैं। डोला की योजना गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इस ड्रग की निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करने की थी, ताकि आने वाले समय में पूरे देश को इस सिंथेटिक नशे की गिरफ्त में लिया जा सके।
ढाबों और पोल्ट्री फार्मों में छिपी अवैध लैब का नेटवर्क
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि डोला का सिंडिकेट ड्रग उत्पादन के लिए किसी बड़ी फैक्ट्री के बजाय सड़क किनारे बने ढाबों, पोल्ट्री फार्मों और सुनसान ठिकानों का इस्तेमाल कर रहा था। पकड़े जाने के डर से ये अपराधी अपनी निर्माण इकाइयों को लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करते रहते थे। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस सिंडिकेट ने निर्माण प्रक्रिया के लिए युवाओं को प्रशिक्षित किया था और उन्हें 'डार्क वेब' के माध्यम से ड्रग बनाने की विधियां सिखाई गई थीं। डोला का यह नेटवर्क केवल मेफेड्रोन तक सीमित नहीं था, बल्कि वह मैंड्रेक, चरस और मेथामफेटामाइन जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप तक फैला चुका था।
आतंकी फंडिंग पर चोट और बड़ी बरामदगी का सिलसिला
खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों का मानना है कि डोला की गिरफ्तारी से आईएसआई समर्थित उन आतंकी समूहों के वित्तपोषण (फंडिंग) पर भी लगाम लगेगी, जो भारत के खिलाफ मादक पदार्थों की तस्करी से पैसा जुटाते हैं। भारत में पिछले दो वर्षों के दौरान ड्रग्स की रिकॉर्ड बरामदगी हुई है, जिसमें अकेले इस साल जनवरी में 81 करोड़ रुपये की मेफेड्रोन जब्त की गई थी। 'ऑपरेशन सह्याद्री चेक मेट' जैसे अभियानों के जरिए राजस्व खुफिया निदेशालय ने मोबाइल लैब को ध्वस्त कर तस्करी के बड़े प्रयासों को विफल किया है। सलीम डोला से पूछताछ के बाद अब उन रसायनज्ञों और फार्मा डीलरों के नेटवर्क की पहचान की जा रही है, जो पर्दे के पीछे रहकर इस काले कारोबार में सहयोग कर रहे थे।
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