चलती ट्रेन में यात्री की हालत खराब, नरसिंहपुर स्टेशन पर मिला इलाज
नरसिंहपुर: पश्चिम मध्य रेलवे के नरसिंहपुर स्टेशन पर गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया जब मुंबई से कोडरमा जा रही डाउन मेल ट्रेन में एक यात्री की हालत अचानक नाजुक हो गई। छत्तीसगढ़ का रहने वाला छत्तीस वर्षीय रमेश इस सफर के दौरान बार-बार बेसुध हो रहा था, जिसकी जानकारी मिलते ही रेल प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया। जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रुकी, रेलवे के मेडिकल स्टाफ ने मोर्चा संभाला और पाया कि यात्री न केवल गंभीर संक्रामक बीमारी चिकन पॉक्स की चपेट में था, बल्कि भीषण गर्मी के कारण उसे भारी निर्जलीकरण की समस्या भी हो गई थी।
आपातकालीन चिकित्सा सहायता और तत्काल सुधार
ट्रेन के रुकते ही रेलवे चिकित्सक डॉ. आर.आर. कुर्रे ने बिना समय गंवाए बीमार यात्री की जांच शुरू की और उसे प्राथमिक उपचार प्रदान किया। मरीज को आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं और तरल पदार्थ दिए गए, जिससे कुछ ही समय में उसकी स्थिति में स्थिरता आने लगी। डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि अत्यधिक तापमान और शरीर में पानी की कमी ने चिकन पॉक्स के लक्षणों को और अधिक गंभीर बना दिया था, जिससे यात्री बेहोशी की स्थिति में पहुंच गया था। प्राथमिक चिकित्सा के बाद जब रमेश की सेहत में सुधार दर्ज किया गया, तब सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए उसे सावधानी के साथ आगे का सफर जारी रखने की अनुमति प्रदान की गई।
संक्रामक रोगों के दौरान यात्रा के जोखिम
चिकित्सकों ने इस घटना के माध्यम से चिकन पॉक्स जैसी बीमारियों की संक्रामक प्रकृति पर चिंता व्यक्त की है, जो हवा और संपर्क के माध्यम से साथी यात्रियों में तेजी से फैल सकती हैं। डॉ. कुर्रे ने बताया कि ऐसे हालात में मरीज को न केवल दवाइयों की बल्कि पूर्ण विश्राम और स्वच्छ वातावरण की अत्यंत आवश्यकता होती है। चलती ट्रेन के सीमित दायरे में संक्रामक बीमारी के साथ सफर करना मरीज की अपनी रिकवरी को धीमा कर सकता है और कोच में मौजूद अन्य लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है।
रेल यात्रियों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा परामर्श
इस वाकये के बाद रेलवे चिकित्सा विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी संक्रामक या गंभीर बीमारी की अवस्था में लंबी दूरी की यात्रा करने से परहेज करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सफर शुरू करने से पहले डॉक्टर की लिखित अनुमति और सलाह लेना अनिवार्य होना चाहिए ताकि संक्रमण के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सके। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को सुझाव दिया है कि यदि यात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ती है, तो तुरंत रेल मदद एप या कंट्रोल रूम को सूचित करें ताकि अगले स्टेशन पर समय रहते चिकित्सीय सहायता सुनिश्चित की जा सके और किसी भी अनहोनी को टाला जा सके।
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