मां … एक शब्द नहीं, पूरा संसार
कल इंटरनेशनल मदर्स डे(10 मई) पर विशेष
मां …
एक शब्द नहीं, पूरा संसार होती है,
जिसकी गोद में हर थकन की हार होती है।
उसकी मुस्कान में सुकून का घर बसता है,
उसकी दुआओं से हर रास्ता सजता है।
जब भी गिरते हैं हम, वो थाम लेती है,
खुद रोकर भी हमें हंसा देती है।
उसकी ममता सागर से भी गहरी होती है,
उसकी छाया में ही जिंदगी ठहरी होती है।
न कोई शर्त, न कोई शिकायत होती है,
मां की मोहब्बत तो बस इबादत होती है।
वो रोटी में स्वाद, वो लोरी में नींद है,
वो हर दर्द की सबसे सच्ची दवा की तरह प्रीत है।
मां …
उसके बिना सब अधूरा - सा लगता है,
क्योंकि वही तो है, जिससे “घर” पूरा -सा लगता है।

Image by Gerd Altmann from Pixabay
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