महाभारत की इस कथा में भीष्म पितामह की एक बड़ी भूल का जिक्र मिलता है, जिसने आगे चलकर कौरव वंश के विनाश की नींव रख दी। गांधारी की कुंडली में वैधव्य योग होने की बात सामने आने पर राजा सुबाल ने शास्त्रीय उपाय के तहत उनका विवाह पहले एक बकरे से कराया और बाद में उसकी बलि दे दी, ताकि दोष समाप्त हो जाए।

लेकिन जब यह बात भीष्म पितामह को पता चली, तो उन्होंने इसे हस्तिनापुर के राजपरिवार के साथ छल माना। क्रोधित होकर भीष्म ने गांधार नरेश सुबाल और उनके पुत्रों को बंदी बना लिया। कहा जाता है कि उन्हें कारागार में बहुत कम भोजन दिया जाता था, जिससे एक-एक कर सभी की मृत्यु होने लगी।

इसी दौरान सुबाल ने अपने पुत्र शकुनि को जीवित रखने के लिए सारा भोजन उसे देना शुरू किया, ताकि वह भविष्य में इस अपमान का बदला ले सके। मरने से पहले सुबाल ने शकुनि को कौरव वंश के विनाश का संकल्प दिलाया। यही वजह मानी जाती है कि शकुनि ने दुर्योधन के मन में पांडवों के प्रति ईर्ष्या और द्वेष भर दिया, जिसका परिणाम महाभारत युद्ध के रूप में सामने आया।