जगन्नाथ पुरी मंदिर तो खूब गए होंगे लेकिन यहां साल भर होती है मां की पीठ की पूजा, केवल एक बार होते हैं दुर्लभ मुख के दर्शन
देशभर में मां भगवती के अलग-अलग मंदिर मौजूद हैं, जिन्हें शक्तिपीठ और सिद्धपीठ मंदिरों के नाम से जाना जाता है लेकिन प्रकृति की गोद में बहुत सारे ऐसे चमत्कारी और रहस्यमयी मंदिर छिपे हैं, जिनके बारे में लोगों को बहुत कम ही जानकारी है. ऐसा ही एक मंदिर ओडिशा में है, जहां मां के मुख ही नहीं बल्कि पीठ की पूजा होती है और साल में एक ही बार मां के मुख के दर्शन भक्त कर पाते हैं. आप ओडिशा के जगन्नाथ पुरी मंदिर तो खूब गए होंगे, एकबार इस मंदिर में जाकर भी दर्शन अवश्य करें. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और भक्तों को कष्टों से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं माता के इस मंदिर के बारे में खास बातें…
मां कुरैसुनी मंदिर की मान्यता
ओडिशा के गंजम जिले के पात्रपुर ब्लॉक में नुवागाड़ा गांव में स्थित मां कुरैसुनी मंदिर एक प्रसिद्ध और प्राचीन हिंदू तीर्थ स्थल है. यह मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के लिए जाना जाता है, जहां साल भर देवी मां की पीठ की पूजा की जाती है और केवल आश्विन महीने की दुर्गाष्टमी को उनके मुख के दर्शन होते हैं. यह सुरम्य प्राकृतिक परिवेश में स्थित है. माना जाता है कि मां के दर्शन मात्र से ही दुखों से छुटकारा मिलता है और मां के मुख के दुर्लभ दर्शन से भक्त की हर मनोकामना पूरी होती है.
दक्षिण भारतीय शैली से मंदिर की बनावट
स्थानीय पुजारी दीनबंधु जानी के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण सुरंगी के राजा ने 1900 के दशक के आरंभ में करवाया था. मंदिर का बनाव और शैली भी दक्षिण भारतीय शैली से प्रेरित लगती है, जहां गोरपुरम रंग-बिरंगे रंगों से सजे हैं और गोपुरम पर कई देवी-देवताओं की सुंदर प्रतिमाओं को उकेरा गया है. मंदिर के आस-पास का नजारा भी मन को सुकून देने वाला है क्योंकि चारों तरफ जंगल और हरियाली है. यह अध्यात्म और मन की शांति पाने के लिए अद्भुत स्थल है.
मंदिर के बाहर एक पेड़ भी मौजूद
मंदिर के प्रांगण में मां काली को समर्पित कई प्रतिमाएं बनी हैं, जिसमें मां अपने रौद्र रूप में दर्शन दे रही हैं. मंदिर के बाहर एक पेड़ भी है जिसे इच्छा पूर्ति पेड़ कहा जाता है. इस पेड़ पर भक्त अपनी मुराद की पूर्ति के लिए लाल रंग की चुनरी बांध कर जाते हैं. स्थानीय लोगों के बीच मंदिर को लेकर बहुत आस्था है लेकिन बाहर के राज्यों से आए भक्त इस मंदिर के दर्शन से वंचित रह जाते हैं. यह मंदिर साल भर, विशेष रूप से त्योहारों और शुभ अवसरों पर भक्तों को आकर्षित करता है, जिससे यह एक जीवंत आध्यात्मिक केंद्र बन जाता है. भक्त इस पवित्र स्थल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शांति का अनुभव कर सकते हैं.
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