पाकिस्तान क्यों नहीं मानता अब्राहम समझौता? पासपोर्ट नियमों से जुड़ा बड़ा कारण
इस्लामाबाद: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान पर 'अब्राहम समझौते' (Abraham Accords) में शामिल होने और इस्राइल के साथ संबंध सामान्य करने का भारी दबाव बनाया है। हालांकि, पाकिस्तान ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। पाकिस्तान सरकार ने साफ किया है कि इस्राइल को लेकर उसकी दशकों पुरानी और दीर्घकालिक नीति में कोई बदलाव नहीं होगा और वह इस तरह के किसी भी बाहरी दबाव को मानने के लिए बाध्य नहीं है।
पाकिस्तान को क्यों बदलना पड़ेगा अपना पासपोर्ट?
अब्राहम समझौते में शामिल होने से इनकार करने के पीछे पाकिस्तान की एक बड़ी तकनीकी और नीतिगत मजबूरी भी है। यदि पाकिस्तान इस समझौते को स्वीकार करता है, तो उसे तुरंत अपने देश का पासपोर्ट बदलना पड़ेगा।
दरअसल, वर्तमान में पाकिस्तान के नागरिकों को इस्राइल की यात्रा करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। पाकिस्तानी पासपोर्ट पर साफ-साफ शब्दों में छपा होता है: 'यह पासपोर्ट इस्राइल को छोड़कर दुनिया के सभी देशों में यात्रा के लिए मान्य है।'
सिर्फ दिखावा नहीं, बदलने होंगे कई कड़े नियम
यदि पाकिस्तान अमेरिकी दबाव में इस्राइल को मान्यता दे देता है, तो उसे अपने पासपोर्ट से इस प्रतिबंध वाले हिस्से को हटाना होगा। यह बदलाव सिर्फ कागजी या प्रतीकात्मक नहीं होगा, बल्कि इसके बाद पाकिस्तान को अपने वीजा नियम, आव्रजन (इमिग्रेशन) कानून और कांसुलर पहुंच जैसी जटिल व्यवस्थाओं में भी बड़ा बदलाव करना पड़ेगा, जो उसकी पूरी विदेश नीति को उलट कर रख देगा।
घरेलू स्तर पर भारी विरोध का डर
पासपोर्ट और कूटनीतिक बदलावों के अलावा, पाकिस्तान सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती घरेलू स्तर पर जनता का गुस्सा है। पाकिस्तान की जनता और वहां के कट्टपंथी संगठन इस्राइल को मान्यता देने के सख्त खिलाफ हैं। ऐसे में अगर सरकार कोई भी कदम पीछे खींचती है, तो उसे देश के भीतर भारी राजनीतिक विरोध और अशांति का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन की इस मांग के आगे झुकने से साफ मना कर दिया है।
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