कर्नाटक नेतृत्व परिवर्तन पर नया ट्विस्ट: राज्यपाल के अचानक मुंबई रवाना होने की चर्चा
बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की लंबी बैठक के बाद राज्य में नेतृत्व परिवर्तन यानी मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें बेहद तेज हो गई हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने आवास पर पार्टी नेताओं और कैबिनेट सहयोगियों की एक अहम 'ब्रेकफास्ट मीटिंग' (नाश्ते पर बैठक) बुलाई, जिससे पहले उनके घर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के भीतर सत्ता हस्तांतरण को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है और राज्य में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
डीके शिवकुमार के घर बंटी मिठाइयां
डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की खबरों के बीच उनके समर्थकों में भारी उत्साह और खुशी की लहर दौड़ गई है। बेंगलुरु में डीके शिवकुमार के आवास के बाहर सुबह से ही उनके समर्थकों का जमावड़ा लग गया, जहां लोगों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर जश्न मनाया। इस दौरान बेंगलुरु के पूर्व मेयर आर संपत भी शिवकुमार के घर पहुंचे और समर्थकों के साथ इस खुशी में शामिल हुए।
विपक्ष ने घेरा, कहा- राजनीतिक तमाशा बन गई है सरकार
राज्य के इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की जनता इन सारे राजनीतिक ड्रामे पर पैनी नजर रख रही है और कांग्रेस को कन्नड़ भाषी लोगों के सब्र को उनकी कमजोरी नहीं समझना चाहिए। अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के आंतरिक सत्ता-संघर्ष के कारण विकास, जनता की भलाई, किसानों की चिंताएं और युवाओं का भविष्य पूरी तरह हाशिये पर चला गया है। उन्होंने कहा कि विधान सौधा (विधानसभा) अब शासन का केंद्र नहीं, बल्कि राजनीतिक वजूद की लड़ाई का मैदान बन चुका है, जिसने देश के सामने कर्नाटक की छवि खराब की है।
इस्तीफे की चर्चाओं के बीच सिद्धारमैया का बड़ा दांव
सीएम पद से इस्तीफे की खबरों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर अपनी बड़ी कामयाबी का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि राज्य के सभी समुदायों की सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति जानने के लिए उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में पिछड़ा वर्ग आयोग को एक सर्वे का निर्देश दिया था, जिसे बाद की सरकारों ने स्वीकार नहीं किया। सिद्धारमैया ने कहा कि आज उन्होंने बेहद संतोष के साथ इस सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण की नई रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है, जो आने वाले दिनों में सामाजिक न्याय लागू करने में मील का पत्थर साबित होगी। इस मौके पर उनके कई कैबिनेट सहयोगी और कानूनी सलाहकार भी मौजूद रहे।
राज्यपाल का मुंबई और इंदौर दौरा
इन तमाम सियासी हलचलों के बीच कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत 27 और 28 मई को मुंबई, इंदौर और उज्जैन के दौरे पर रहेंगे। उनके तय कार्यक्रम के अनुसार, वे हवाई और सड़क मार्ग से यात्रा करेंगे और मुंबई में रात्रि विश्राम भी करेंगे। राज्यपाल की 'Z+' सुरक्षा को देखते हुए संबंधित प्रशासन को सुरक्षा, गाड़ियों के काफिले और प्रोटोकॉल से जुड़ी सभी जरूरी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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