उद्दंत मार्तण्ड के साथ हुआ हिंदी पत्रकारिता का आगाज
आज 200वीं वर्षगांठ पर विशेष
अकबर इलाहाबादी कहते हैं
तीर निकालो न तलवार निकालो, जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो
अखबार की शक्ति के सामने तीर, तलवार और तोप भी बौने है। भारत की यह शक्ति कब उदित हुई, कब इसका सूर्य चमका इस संबंध में प्रस्तुत है भारतीय पत्रकारिता का सर्वाधिक पुराना इतिहास । साथ ही आपके लिए है भारत के प्रथम अंग्रेजी और हिन्दी समाचार पत्र के मुख पृष्ठ की सत्य प्रतिलिपि धरती पर जीवन की शुरुआत के साथ मानव ने अपनी अनिवार्यताओं की पूर्ति के लिए प्रयत्न किये होंगे । इन प्रयत्नों के दौरान उसे जो भी नया और अनजाना लगा होगा। उसकी जानकारी उसने दूसरे लोगों को संकेतों या अन्य माध्यमों से दी होगी । टर्नल कालेज ने समाचारों को परिभाषित करते हुए कहा है कि वह सभी कुछ जिससे आप कल तक अनभिज्ञ थे , समाचार है । अर्थात पाषाण युग से ही मानव एक दूसरे को यदि नयी और अनजानी चीजों से अवगत कराते थे तो इस अर्थ में वे दूसरों को समाचार देते थे ।
मानव के इतिहास की तरह समाचार और समाचार पत्र का इतिहास भी बहुत रोचक है । आज यह बात भले ही हमें विचित्र लगे किन्तु प्राचीन काल में गांव के मेले, मड़ई, चौपाल और उत्सव समाचारों के सबसे बड़े केन्द्र हुआ करते थे । उस समय के लोगों की आपबीती और जगबीती सुनने-सुनाने का दौर ही आज का समाचार पत्र पढ़ना या समाचार सुना जाना है । एक गांव से, एक व्यक्ति का दूसरे गांव या कस्बे में जाने का अर्थ होता था उन दोनों स्थानों से संबंधित तमामनकारियों का आदान-प्रदान और इन कार्यों को बखूबी निभाते थे बंजारे ।
समाचार भेजने के विश्वसनीय माध्यमों में ढोल, नगाड़े और पक्षी सबसे पहले आते थे । यूरोप और पश्चिमी एशिया के देशों में जासूस और संदेशवाहक खबरें एकत्र करने का काम किया करते थे । सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी में फ्रांस में सालोन और ब्रिटेन में काॅफी हाउस में लेखक और बुद्धिजीवी की चर्चाएं ही समाचारों का सम्प्रेषण स्थल हुआ करता था । राजाओं की आज्ञाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए शिलालेखों का प्रयोग होता था । रोमन लोग नगर के चौक या चौराहों में हाथ से लिखे इश्तेहार दीवार पर चस्पा कर दिया करते थे। इन्हें एकता डायूर्ना (दैनिक घटनाएं ) कहा जाता था। जूलियस सीजर (100 से 44 ई.पू.) की तमाम लड़ाइयों और साम्राज्य के विस्तार का सारा विवरण एकता डायूर्ना में दिया गया था ।
मध्य कालीन भारत में भी संचार और संवाद वहन के प्रबंध होते थे । मुसलमान शासकों ने खबरों के संकलन को बहुत महत्व दिया था । यही कारण है कि इनके काल में समाचार सम्प्रेषण का कार्य बेहद नियोजित ढंग से चलता था । खबरनवीस या वाकियानवीस खबरें एकत्र करते थे, फिर योजनामचा तैयार किया जाता था जिसे कासिद या हरकारे द्वारा भेजा जाता था । मुगल ज़माने के पत्रकारों में खुफियानवीस (गुप्तहाल लिखने वाले) सवान्हनवीस (जीवनियां लिखने वाले ) हरकारे ( संदेश वाहक जो खबरें सुनाया भी करते थे ) और कासिद सर्वाधिक प्रमुख थे ।
अकबर, मुहम्मद तुगलक और शेरशाह सूरी के युग में खबरें भेजने की व्यवस्था काफी उन्नत थी । अवध के नवाबों के पास 660 खबरनवीस हुआ करते थे । शिवाजी के समय भी इनका काफी महत्व था । औरंगजेब (1658-1707) के शासनकाल में विधिवत रुप से हस्तलिखित समाचार पत्र भी जारी हो गये थे जिन्हें दरबार में महिलाएं रात को 9 बजे पढ़ा करती थी ।
इन तरीकों के अलावा भारत में देशाटन की परंपरा ने भी समाचारों के आदान-प्रदान में एक बड़ी भूमिका अदा की है । आधुनिक पत्रकारिता का इतिहास इतना पुराना नहीं है । सन् 1566 के लगभग यूरोप के शहरों में रिवाज़ था कि चौराहों पर खड़े होकर हस्तलिखित इश्तहार लोगों को सुनाएं जाते थे । ये इश्तेहार सरकार की स्वीकृति से लिखे जाते थे और इसे सुनने वाले इस सेवा के लिए एक गजीटा दिया करते थे । गजीटा उस समय का एक छोटा सिक्का होता था और यही गजीटा बाद में गजट बन गया जिसे अंग्रेजी में समाचार पत्र के लिए इस्तेमाल किया जाता है ।
माना जाता है कि पहला छपा हुआ समाचार पत्र सन 1609 में जर्मनी में निकला । इसके बाद इंगलैंड में सन 1620 में तथा फ्रांस में 1630 में पहला समाचार पत्र छपा । संयुक्त राज्य अमेरिका में सन 1690 में प्रथम समाचार पत्र प्रकाशित हुआ । कहा तो यह भी जाता है कि चीन में सबसे पहला समाचार पत्र छटवीं शताब्दी में निकला जो लगभग 1500 वर्षों तक चलता रहा ।
आधुनिक पत्रकारिता की प्रेरणा भारत को इंगलैंड से मिली किंतु भारत में सन 1557 को ही गोवा में पहला छापाखाना लगाया जा चुका था जिसमें सबसे पहले ईसाई धर्म की पुस्तक मलयालम भाषा में छपी थी जिसे सेंट फ्रांसिस सैचीयर ने लिखा था उसके बाद अंग्रेजी छापाखाना 1674 में बम्बई में स्थापित किया गया और लगभग वर्ष बाद 1772 में मद्रास और 1779 में कलकत्ता में सरकारी छापेखाने की स्थापना हुई.
भारत में पहला समाचार पत्र निकालने का प्रयत्न ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी विलियम वोल्टास ने किया । 1768 में कलकत्ता के कौंसिल हाल एवं प्रमुख स्थानों में एक नोटिस लगाया गया था जिसमें लिखा गया था -'जन साधारण से ' इस तरह वोल्टास लोगों को सूचना देते थे । वोल्टास को भारत से बाहर भेज दिया गया परंतु वे माने नहीं और बाद में उन्होंने कंपनी प्रशासन का भंडाफोड़ एक पुस्तक कन्सीडरेशनल आन इंडियन अफेयर्स में किया ।वोल्टास के इश्तहार को भारतीय जन माध्यम का जनक कहा जाता है किन्तु भारत में प्रेस के असली जन्मदाता माने जाते हैं-जेम्स आगस्टस हिक्की । 29 जनवरी सन 1780 भारत के इतिहास में वह महत्वपूर्ण दिवस है जब ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारी जेम्स आगस्टस हिक्की ने बंगाल गजट ( केलकट्टा जनरल एडवाइजर) नामक पत्र प्रकाशित कर भारतीय पत्रकारिता की नींव रखी। यह समाचार पत्र हिक्की - गजट के नाम से मशहूर हुआ किंतु हिक्की को इसके परिणामस्वरुप जून 1981 में" कारावास एवं 5000 रुपये अर्थ दंड से दंडित किया गया। हिक्की की डाक सुविधा छीनना और उसे जेल भेजना भी इस निर्भीक पत्रकार के आक्रमण को रोक नहीं सके' । हिक्की का यह वक्तव्य पत्रकारों के लिए सदैव प्रेरणास्पद रहेगा । अपने मन और आत्मा की स्वतंत्रता के लिए अपने शरीर को बंधन में डालने में मुझे आनंद आता है। धन्य है भारत के प्रथम समाचार पत्र का जनक हिक्की । हिक्की का बंगाल गजट दो पृष्ठ का हुआ करता था । 12 इंच लंबा और 8 इंच चौड़ा तथा दोनों ओर से तीन काॅलम में छपाई किया हुआ बंगाल गजट हिक्की द्वारा लिखे कालम ए पोयटस कार्नर के कारण विशेष चर्चित था।
1780 में ही दूसरा समाचार पत्र इंडिया गजट भी निकला और कई अन्य पत्र भी निकलने लगे किंतु सरकार के कड़े नियमों के कारण हिक्की, विलियम डुएन और बंगाल हरकारू के डाॅ चार्ल्स मेकलीन को कड़ा संघर्ष करना पड़ा । संघर्ष के इसी दौर में लार्ड हेस्टिंग्स गवर्नर जनरल पूर्ववती अन्य जनरलों की अपेक्षा प्रेस के प्रति अधिक उदार और सहृदय रुप में उपस्थित हुए और भारतीय समाचार पत्रों के लिए दूसरे अध्याय का आरंभ हुआ । पहली बार एक भारतीय गंगाधर भट्टाचार्य ने बंगाल गजट के नाम से पत्र प्रकाशित किया । किंतु इससे पूर्व भी बंगला में पहला पत्र सन् 1818 में मासिक दिग्दर्शन नाम से शुरु हुआ। यह ईसाई पादरियों का पत्र था । सन 1818 में ही बंगाल में एक और पत्रिका समाचार दर्पण नाम से प्रकाशित हुई । इसके अलावा फैण्ड आफ इंडिया भी छपता रहा ।
भारतीय पत्रकारिता के वास्तविक जन्मदाताओं में राजा राम मोहन राय (1772-1833) का नाम विशेष रुप से उल्लेखनीय है । उन्होंने सन 1821 में बंगला में संवाद कौमुदी और फारसी में मिरातुल अखबार जारी किए । उर्दू का सबसे पहला समाचार पत्र -जामे - जहानुमा था जो सन 1822 में शुरु हुआ था. इस बीच प्रेस संबंधित अनेक अधिनियम बनते रहे और साथ ही अनेक
भारतीय भाषाओं के प्रकाशन का भी दौर आरंभ होता रहा । मंगलवार 30 मई 1826 को कलकत्ता से हिन्दी का प्रथम पत्र उदन्त मार्तण्ड प्रकाशित हुआ । भारत की अपनी हिन्दी भाषा का प्रथम साप्ताहिक पत्र जिसके संस्थापक थे कानपुर निवासी पंडित जुगल किशोर सुकुल । उदन्त मार्तण्ड का अर्थ है समाचार सूर्य । इस पत्र में सरकारी अफसरों की नियुक्तियां, तबादले, जनता के लिए सरकारी सूचनाएं , जहाजों के समाचार, बाजार भाव और चुटकले आदि प्रकाशित होते थे ।
भारत के इस समाचार सूर्य के बाद तो बाल गंगाधर तिलक के केसरी, मराठा से लेकर हिन्दू, कस्तूरी, अमृत बाजार पत्रिका और अनेक समाचार पत्रों ने अपना इतिहास बनाया किन्तु भारत को यह समाचार सूर्य और हिक्की का गजट हमारे पत्रकारिता. जगत के लिए आज भी सूर्य और चांद की तरह रौशन है और रहेंगे ।
रीमा दीवान चड्ढा, नागपुर
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