लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सितंबर-अक्टूबर के महीने में होने वाले संभावित विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अभी से अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी इन सभी 11 सीटों पर क्लीन स्वीप करने के इरादे से मजबूत चेहरों को अपने पाले में लाने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा बेहद तेज है कि आगरा शिक्षक निर्वाचन सीट से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले आकाश अग्रवाल जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकते हैं। इसके अलावा, गोरखपुर-अयोध्या (फैजाबाद) शिक्षक सीट से निर्दलीय (शर्मा गुट) एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी की भी भाजपा में एंट्री लगभग तय मानी जा रही है। वहीं, शर्मा गुट के ही कद्दावर नेता और पूर्व एमएलसी सुरेश त्रिपाठी के भी भाजपा में शामिल होने की अटकलें हैं, जो इस बार प्रयागराज (इलाहाबाद)-झांसी स्नातक सीट से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

टिकट की गारंटी पर शामिल हो सकते हैं आकाश अग्रवाल

गौरतलब है कि साल 2020 के चुनाव में आकाश अग्रवाल ने आगरा शिक्षक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर दांव खेला था और भाजपा व सपा दोनों के प्रत्याशियों को शिकस्त देकर जीत हासिल की थी। सूत्रों के हवाले से खबर है कि आकाश अग्रवाल की भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ एक दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है। कहा जा रहा है कि यदि भाजपा उन्हें इसी साल होने वाले चुनाव में आगरा सीट से टिकट देने का पक्का भरोसा देती है, तो वे आधिकारिक तौर पर भगवा दल में शामिल हो जाएंगे।

ध्रुव कुमार त्रिपाठी की जॉइनिंग जल्द होने के आसार

दूसरी ओर, एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के समीकरण कुछ अलग हैं। साल 2020 के चुनाव में भाजपा ने उनके खिलाफ अपना कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं किया था, जिसे राजनीतिक तौर पर उनका अघोषित समर्थन माना गया था। हालांकि, इस बार पार्टी का रुख साफ है कि उन्हें टिकट तभी दिया जाएगा जब वे औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता लेंगे। यही कारण है कि ध्रुव त्रिपाठी का भाजपा में आना तय हो चुका है और सूत्रों का दावा है कि अगले दो हफ्तों के भीतर वे लखनऊ में पार्टी की सदस्यता ले सकते हैं।

दिसंबर में खाली हो रही हैं 11 सीटें

आपको बता दें कि ध्रुव कुमार त्रिपाठी लगातार तीन बार से विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) रहे हैं। वहीं, उनके साथी और तीन बार के पूर्व एमएलसी सुरेश त्रिपाठी को साल 2023 के चुनाव में प्रयागराज (इलाहाबाद) शिक्षक सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक क्षेत्र के कुल 11 सदस्यों का कार्यकाल इसी साल 6 दिसंबर 2026 को पूरा हो रहा है, जिसके चलते इन महत्वपूर्ण सीटों पर साल के आखिर तक चुनाव संपन्न कराए जाने हैं।