सौरव गांगुली की सुरक्षा में बड़ी कटौती, Z से Y कैटेगरी में हुए शिफ्ट
पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के मौजूदा अध्यक्ष सौरव गांगुली की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य प्रशासन द्वारा की गई हालिया उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा के बाद गांगुली की सुरक्षा को 'Z' (जेड) कैटेगरी से घटाकर अब 'Y' (वाई) कैटेगरी कर दिया गया है। 'दादा' के नाम से मशहूर सौरव गांगुली को पिछले कुछ वर्षों से राज्य में जेड श्रेणी की वीवीआईपी (VVIP) सुरक्षा दी जा रही थी, लेकिन नई प्रशासनिक नीति के तहत अब उनके सुरक्षा घेरे को छोटा करने का फैसला लिया गया है।
सुरक्षा घेरे में आएगी कमी, पायलट वाहन भी हटेगा
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल के दौरान सौरव गांगुली को जेड श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। उस समय उनकी सुरक्षा और आवास की निगरानी में करीब 30 से 35 सशस्त्र पुलिसकर्मी चौबीसों घंटे तैनात रहते थे। इसके साथ ही जब भी वे कहीं सफर करते थे, तो उनके काफिले के आगे एक विशेष पायलट वाहन (एस्कॉर्ट गाड़ी) भी चलता था।
अब 'वाई' श्रेणी की नई सुरक्षा व्यवस्था लागू होने के बाद उनके साथ तैनात रहने वाले सुरक्षाकर्मियों की संख्या काफी कम हो जाएगी और काफिले से एस्कॉर्ट गाड़ियों को भी हटा लिया जाएगा।
प्रशासनिक नीतियों और बदले राजनीतिक समीकरणों से जुड़ा फैसला
इस कदम को राज्य की कानून-व्यवस्था और वीवीआईपी सुरक्षा के लिए बनी नई गाइडलाइंस से जोड़कर देखा जा रहा है। राज्य में सत्ता परिवर्तन और नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि सरकारी खजाने पर बोझ कम करने के लिए केवल उन्हीं विशिष्ट व्यक्तियों को अतिरिक्त सुरक्षा कवर दिया जाएगा, जिनकी जान को खुफिया रिपोर्ट में वास्तविक और गंभीर खतरा (थ्रेट परसेप्शन) बताया गया हो।
इसी नई नीति के तहत केवल सौरव गांगुली ही नहीं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, सांसद अभिषेक बनर्जी सहित राज्य के कई अन्य कद्दावर नेताओं, मंत्रियों और पूर्व नौकरशाहों की सुरक्षा व्यवस्था की भी नए सिरे से समीक्षा की जा रही है।
हमेशा राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में रहे हैं 'दादा'
भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल और आक्रामक कप्तानों में शुमार सौरव गांगुली का नाम खेल से संन्यास लेने के बाद भी बंगाल और देश की राजनीति में लगातार सुर्खियों में रहा है।
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साल 2021 का चुनाव: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) उन्हें राज्य में अपने सबसे बड़े चेहरे के रूप में पेश कर सकती है। इस सिलसिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गांगुली के कोलकाता स्थित आवास पर जाकर उनसे मुलाकात भी की थी, लेकिन सौरव ने खुद को सक्रिय चुनावी राजनीति से पूरी तरह दूर रखा।
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संतुलित संबंध: राजनीति से दूरी बनाए रखने के बावजूद बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके मधुर संबंध बने रहे, जिसके चलते वर्ष 2023 में उन्हें त्रिपुरा पर्यटन का ब्रांड एंबेसडर भी नियुक्त किया गया था। दूसरी ओर, उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ भी हमेशा सौहार्दपूर्ण रिश्ते बनाए रखे। वे ममता बनर्जी के स्पेन दौरे में उनके साथ आधिकारिक डेलिगेशन का हिस्सा थे और राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ाने से जुड़े सरकारी मंचों पर भी नजर आते थे।
फैसले पर गांगुली की चुप्पी, राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों धुर विरोधी दलों (TMC और BJP) के साथ समान दूरी और संतुलन बनाए रखने की सौरव की पुरानी रणनीति को राज्य के इस नए प्रशासनिक और राजनीतिक माहौल में अब एक अलग नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, अपनी सुरक्षा में की गई इस कटौती को लेकर सौरव गांगुली या उनके करीबी सूत्रों की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक या सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन राज्य सरकार के इस अचानक लिए गए फैसले ने कोलकाता के सचिवालय (नबन्ना) से लेकर पूरे बंगाल के राजनीतिक और खेल हलकों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
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