प्रशासन से साहित्य तक शानदार सफर, पूर्व IAS बी. के. एस. रे को श्रद्धांजलि
रायपुर: छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सेवा के शीर्ष स्तंभ रहे 1972 बैच के पूर्व वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी और प्रख्यात लेखक बी.के.एस. रे (बिजय कुमार सत्पथी रे) का दुखद निधन हो गया है। उनके महाप्रयाण की खबर मिलते ही समूचे प्रशासनिक अमले, नौकरशाहों और साहित्यिक गलियारों में गहरे शोक की लहर दौड़ गई है। बी.के.एस. रे ने लंबे समय तक अविभाजित मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अपनी उत्कृष्ट प्रशासनिक सेवाएं दी थीं। सेवानिवृत्ति के बाद वे पूरी तरह से मां सरस्वती की साधना और साहित्य लेखन में रम गए थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई कालजयी और विख्यात पुस्तकों की रचना की।
1 जून को ही हुआ था जन्म, जीवन में लिखीं 50 से अधिक पुस्तकें
एक अद्भुत संयोग यह रहा कि बी.के.एस. रे का जन्म 1 जून 1949 को हुआ था और जून महीने के शुरुआती दिनों में ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा। वर्ष 2009 में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) के सर्वोच्च पद से रिटायर्ड होने के बाद, उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा और समय साहित्य जगत को समर्पित कर दिया था। अपने शानदार साहित्यिक सफर के दौरान उन्होंने 50 से भी ज्यादा उत्कृष्ट किताबों का सृजन किया। उनके द्वारा लिखे गए मार्मिक उपन्यास, कविता संग्रह, नाटक और समसामयिक (Current Affairs) विषयों पर आधारित लेख पाठकों के बीच हमेशा चर्चा और सराहना के केंद्र में रहे।
भ्रष्टाचार विरोधी लेखन और प्रशासनिक अनुभवों की दिखती थी झलक
बी.के.एस. रे की कलम में उनके दशकों लंबे प्रशासनिक करियर का गहरा अनुभव, सामाजिक सरोकार और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मुखर आवाज साफ तौर पर दिखाई देती थी। उनके लेखन ने देश और समाज की विसंगतियों पर हमेशा कड़ा प्रहार किया।
उनकी सबसे चर्चित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही गई प्रमुख कृतियों की सूची इस प्रकार है:
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The Boy from Bhubaneswar (उपन्यास)
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The Blind Horizon (समसामयिक विमर्श)
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The Turmoil (प्रशासनिक एवं सामाजिक ताना-बाना)
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Something Goes Beyond Me (प्रसिद्ध कविता संग्रह)
साल 2019 में अंतरराष्ट्रीय ‘सुकरात अवॉर्ड’ से हुए थे सम्मानित
साहित्य के क्षेत्र में उनके अप्रतिम और बहुमूल्य योगदान को देखते हुए वर्ष 2019 में उन्हें प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय ‘सुकरात अवॉर्ड’ (Socrates Award) से नवाजा गया था। वे न केवल एक बेहतरीन लेखक थे, बल्कि जटिल प्रशासनिक मामलों, सरकारी नीतियों और जन-कल्याणकारी योजनाओं पर भी एक विषय-विशेषज्ञ के तौर पर अपनी बेहद सटीक और निष्पक्ष टिप्पणी रखने के लिए जाने जाते थे।
उनके आकस्मिक निधन पर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, देश के जाने-माने साहित्यकारों, पत्रकारों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस अपूरणीय क्षति के बाद रायपुर और उनके गृह राज्य के प्रबुद्ध समाज में सन्नाटा पसरा हुआ है।
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