जहां आज भी गोगाजी महाराज पर है अटूट विश्वास, सांप-बिच्छू के डंक का मिलता है आध्यात्मिक सहारा
बीकानेर: राजस्थान के बीकानेर शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर अंबासर गांव में स्थित गोगाजी महाराज का मंदिर सालों से लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है। इस पौराणिक मंदिर को लेकर लोक मान्यता है कि यहां सच्चे मन से दर्शन करने, प्रसाद चढ़ाने और मंदिर की पवित्र भभूति लगाने से सांप, बिच्छू या किसी भी अन्य विषैले जीव के काटने से पीड़ित व्यक्ति को तुरंत राहत मिल जाती है। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और डॉक्टर किसी भी विषैले जीव के काटने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर सही इलाज कराने की सख्त सलाह देते हैं, लेकिन इसके बावजूद सदियों पुरानी इस आस्था और चमत्कार पर लोगों का विश्वास आज भी कायम है।
एक ही गर्भगृह में कई सिद्ध प्रतिमाएं स्थापित
अंबासर के इस पावन मंदिर की एक बड़ी खासियत यह है कि यहां केवल गोगाजी महाराज ही नहीं, बल्कि उनके साथ कई अन्य महान सिद्ध संतों की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। मंदिर परिसर के भीतर गोगाजी महाराज के साथ-साथ भभूता सिद्ध, केसरिया कंवर जी और गुरु गोरखनाथ जी की दिव्य प्रतिमाएं स्थापित हैं। इन सभी देवों और संतों के एक ही स्थान पर होने के कारण इस मंदिर का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व श्रद्धालुओं के लिए और भी ज्यादा बढ़ जाता है, जहां लोग दूर-दूर से अपनी मन्नतें लेकर आते हैं।
आस्था और विज्ञान का अनोखा मेल
इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि गोगाजी महाराज की भभूति में एक अनोखी शक्ति है, जो जहरीले तत्वों के असर को कम कर देती है। यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी जब किसी को कोई विषैला जीव काटता है, तो वे अस्पताल जाने के साथ या उससे पहले इस मंदिर की चौखट पर जरूर हाजिरी लगाते हैं। हालांकि, प्रशासन और डॉक्टरों का हमेशा यही कहना होता है कि अंधविश्वास से बचकर पहली प्राथमिकता डॉक्टरी इलाज को दी जानी चाहिए, लेकिन लोगों की इस पारंपरिक और सांस्कृतिक आस्था को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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