अभिषेक शर्मा फोटो विवाद क्या है? दिल्ली हाईकोर्ट के रुख के बाद मामला चर्चा में
भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा की तस्वीर और पहचान के कथित गलत और बिना अनुमति के इस्तेमाल से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आज के डिजिटल युग में किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व अधिकारों (पर्सनैलिटी राइट्स) और मानहानि के मामलों के बीच का अंतर बहुत बारीक हो गया है, और कई बार ये दोनों मुद्दे एक-दूसरे में उलझे हुए नजर आते हैं।
AI तकनीक से फोटो से छेड़छाड़ करने का आरोप
क्रिकेटर अभिषेक शर्मा ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, चेहरे और पहचान का इस्तेमाल किया जा रहा है। याचिका में साफ कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दुरुपयोग करके उनकी मूल तस्वीर को बदला गया और समाज में भ्रम फैलाने वाली सामग्री तैयार की गई।
मूल संदर्भ बदलकर छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश
सुनवाई के दौरान अभिषेक शर्मा के वकील ने कोर्ट को बताया कि वास्तविक फोटो में क्रिकेटर अपने मैनेजर के साथ थे। लेकिन AI (एआई) तकनीक का इस्तेमाल करके न सिर्फ मैनेजर का चेहरा बदला गया, बल्कि पूरी फोटो का संदर्भ ही बदल दिया गया। वकील ने दलील दी कि यह सिर्फ फोटो पोस्ट करने का सामान्य मामला नहीं है, बल्कि तकनीक के जरिए छवि बिगाड़कर उसका व्यावसायिक और डिजिटल रूप से गलत फायदा उठाने का गंभीर प्रयास है।
मामले पर अदालत का रुख
दोनो पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने कहा, "हम रोजाना ऐसे मामलों का सामना कर रहे हैं, जहां मानहानि और पर्सनैलिटी राइट्स के बीच का अंतर बहुत धुंधला होता है। कानून का यह क्षेत्र अभी नया है और लगातार विकसित हो रहा है। कई बार जब किसी की मानहानि की जाती है, तो उसमें उसके व्यक्तित्व अधिकारों का हनन भी शामिल होता है।"
सोशल मीडिया कंपनी ने कोर्ट में क्या दी दलील?
मेटा की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि जिन आठ वेब लिंक्स को लेकर शिकायत की गई है, उनमें से दो को पहले ही हटाया जा चुका है। उन्होंने एक अन्य लिंक का हवाला देते हुए कहा कि वह महज एक सामान्य "पापाराजी स्टाइल" की पोस्ट है, जिसे पहली नजर में अधिकारों का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता।
कंपनी का यह भी तर्क था कि यदि इंटरनेट पर मौजूद हर नकारात्मक पोस्ट को पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन माना जाने लगेगा, तो सोशल मीडिया और मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) कंपनियों के लिए हर एक कंटेंट को ट्रैक करके हटाना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन हो जाएगा।
बढ़ते डिजिटल दौर में नई कानूनी चुनौतियां
क्रिकेटर अभिषेक शर्मा का यह मामला उन कई मामलों जैसा ही है, जिसमें फिल्मी सितारे, खिलाड़ी और नामचीन हस्तियां अपनी पहचान और तस्वीरों के AI आधारित गलत इस्तेमाल के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। डीपफेक और एआई के दौर में किसी भी व्यक्ति के वीडियो या फोटो को बदलकर उसे झूठी कहानियों या विज्ञापनों से जोड़ना बेहद आसान हो गया है। अदालतें अब इन मामलों में निजता, अभिव्यक्ति की आजादी और मानहानि के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं। फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई तय की है।
शराब पीकर ड्राइविंग करना पड़ा भारी, पूर्व ऑस्ट्रेलियाई स्टार वॉर्नर ने कोर्ट में कबूला जुर्म
दिल्ली में मेट्रो सेवा प्रभावित, 16 स्टेशन अगले आदेश तक रहेंगे बंद
आर्थिक बदहाली से जूझ रहा पाकिस्तान, बड़ी आबादी गरीबी के शिकंजे में
सड़क हादसों पर हाईकोर्ट की सख्ती, आवारा मवेशियों को लेकर सरकार और NHAI से जवाब तलब
संसद में नहीं थम रहा संग्राम, अखिलेश की तीखी बहस के बीच सदन की कार्यवाही रोकी गई
सदियों पुरानी युवती की कब्र बनी शोध का केंद्र, वैज्ञानिकों ने किए चौंकाने वाले खुलासे
हेयरफॉल से राहत पाने के लिए लोग अपना रहे हैं यह तरीका, जानें कितना कारगर है
Nestle India का शानदार प्रदर्शन, पहली तिमाही में नेट प्रॉफिट 48% बढ़ा
वाराणसी में तनावपूर्ण माहौल, BHU और काशी विद्यापीठ के बाहर भारी पुलिस बल तैनात