साहित्य, विचार और रचनात्मक विविधता का सशक्त मंच बना भारत मंडपम

नई दिल्ली, 20 जनवरी। शनिवार को यहॉं विश्व पुस्तक मेला, भारत मंडपम (प्रगति मैदान) में सृजन बिंब प्रकाशन द्वारा एक साथ 16 पुस्तकों का भव्य लोकार्पण संपन्न हुआ। इस अवसर पर लेखिका एवं प्रकाशक रीमा दीवान चड्ढा की महत्वपूर्ण कृति ‘सृजन के शिखर’ सहित विभिन्न विधाओं की पुस्तकों को पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। यह आयोजन साहित्यिक गरिमा, वैचारिक विविधता और रचनात्मक उत्साह से परिपूर्ण रहा।

कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि इंडिया टुडे के वरिष्ठ उप-संपादक शिवकेश मिश्र रहे, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं साहित्यकार, हिंदी निदेशालय के पूर्व निदेशक डॉ. जगदीश व्योम ने की।

विशिष्ट अतिथियों में साहित्यकार कमलेश भट्ट ‘कमल’, सदीनामा के संपादक वरिष्ठ साहित्यकार जितेन्द्र जितांशु, वरिष्ठ साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुराला तथा ‘किस्सा कोताह’ पत्रिका के संपादक अशोक असफल शामिल रहे।

नागपुर से राष्ट्र पत्रिका के संपादक कृष्ण नागपाल, लेखिका प्रभा ललित सिंह एवं सुधा विज की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। सदीनामा की मीनाक्षी सांगानेरिया के सहयोग से उनके स्टॉल पर पुस्तकों का लोकार्पण संपन्न हुआ। कार्यक्रम में वरिष्ठ व्यंग्यकार आचार्य राजेश कुमार, रण विजय राव एवं उपासना दीक्षित भी उपस्थित रहे। परिजनों में आशा इलावद्धी, रोहन और अनु माथुर की सहभागिता उल्लेखनीय रही।

लोकार्पण समारोह में जिन पुस्तकों का विमोचन किया गया, उनमें राजेश नामदेव की राम नाम की लूट,  श्वेताली ठाकरे की How Will India Surpass a $30 Trillion Economy, नीलिमा करैया की अंतत:, डॉ. प्रकाश आचार्य की Narmade Har, रीमा दीवान चड्ढा की सृजन के शिखर, इला कुमार का कविता-संग्रह निवडक (मराठी अनुवाद: मृणालिनी केलकर), प्रियंका शक्ति ठाकुर की चिंतन यात्रा, सुधा राठौर की आखर के पाखी, डॉ. पूर्णिमा भारद्वाज की सुवासित समिधाएं, सतीश एलिया की मुकम्मल बँटवारा न हुआ / सबसे बड़ा गुनाह, डॉ. ज्योति गजभिये की सबसे कीमती फ्री है, कुंवर इन्द्रजीत सिंह की पुष्पांजलि, गायत्री वात्सल्य की Millets, अशोक असफल की इश्क़ बेनाम, करमजीत कौर की बीजी तथा डॉ. आभा सिंह की टूटी टांग शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, पिछले वर्ष लोकार्पित कुछ महत्वपूर्ण पुस्तकों पर भी चर्चा हुई, जिनमें ‘अनुत्तरित’ (शगुफ्ता यास्मीन काज़ी), ‘भूख के जीन्स’ (वंदना सहाय), दुबई निवासी नितीन उपाध्ये की पुस्तक ‘गाफ के साये में’ तथा मुलायम सिंह की कृति ‘आज का सुदामा’ प्रमुख रहीं।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि इस तरह के सामूहिक लोकार्पण न केवल लेखकों को मंच प्रदान करते हैं, बल्कि पाठकों को समकालीन साहित्य की विविध धाराओं से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि सृजन बिंब प्रकाशन निरंतर साहित्यिक संवाद और गुणवत्ता को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।