संजय अग्रवाल लिखित प्रेरक पुस्तक एफ 5 का विमोचन 

नागपुर, 15 फरवरी. कल वेलेंटाइन डे के अवसर पर स्थानीय द इंस्टिट्यूशन आॅफ इंजीनियर्स (इंडिया) के मुख्य सभागार में भारतीय राजस्व सेवा के वरिष्ठ अधिकारी संजय अग्रवाल की प्रेरणादायक पुस्तक एफ 5 का विमोचन किया गया. इस कार्यक्रम का आयोजन ग्लोबल जर्नलिस्ट एंड राइटर्स एसोएिशन व इंस्टिट्यूशन आॅफ इंजीनियर्स की नागपुर शाखा के संयुक्त तत्वाधान में किया गया था. 

विमोचन से पूर्व पुस्तक का परिचय देते हुए सूचना का अधिकार (आरटीआई) प्रशिक्षक नवीन अग्रवाल ने अपनी समीक्षा में पुस्तक की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अगर वह डॉक्टर होते तो अपने प्रिस्क्रिप्शन में एफ 5 का नाम जरूर लिखते. 

आयोजन में वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट व भगवद्गगीता मर्मज्ञ रवीन्द्र गनेड़ीवाला, लेखिका व समाजसेवी मधु सिंघी, इंस्टिट्यूशन आॅफ इंजीनियर्स, नागपुर के सचिव जयंत जोशी मुख्य अतिथि तथा वरिष्ठ साहित्यकार व खनन भारती के पूर्व संपादक राजेन्द्र पटोरिया कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में शामिल हुए. सभी मंचासीन अतिथियों ने पुस्तक के विषय में अपने—अपने उद्गार व्यक्त किए. 

श्री गनेड़ीवाला ने पुस्तक में वर्णित सभी भागों की प्रशंसा की और इस पुस्तक को एक उपलब्धि बताते हुए कहा कि सभी को एफ 5 को अवश्य पढ़ना चाहिए. वहीं श्रीमती मधु सिंघी ने पुस्तक के लेखक संजय अग्रवाल को 'असली हीरो' बताते हुए कहा कि इनकी पुस्तक F5 वाकई में व्यक्ति को रिफ्रेश करने की ताकत रखती है. कार्यक्रम के सहआयोजक जयंत जोशी ने इंस्ट्यिूटन की संगठनात्मक संरचना व कार्यालापों की जानकारी साझा करते हुए संजय अग्रवाल को पुस्तक के लिए बधाई दी और आशा व्यक्त की कि उनकी अगली पुस्तक भी जल्दी आएगी और उसका विमोचन भी इसी सभागार में किया जाएगा. श्री पटोरिया ने अपने अध्यक्षीय संभाषण में पुस्तक की भूरि—भूरि प्रशंसा की और कहा कि यह पुस्तक हर मायने में हमारे व्यक्तिगत व्यवहारों से जुड़ी है और हमेशा मन को एक नई राह दिखती है. उन्होंने कहा कि संजय अग्रवाल जी की सृजनात्मक शैली इतनी अच्छी है कि उन्हें पूर्ण रूप से साहित्यकार ही होना चाहिए था. 

कार्यक्रम के विशेष आमंत्रित वक्ता के रूप में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के एसपी दीपक गवई ने आयोजन तथा पुस्तक की सफलता के लिए संजय जी को बधाई देते हुए कहा कि इनके नाम में ही 'जय' है, तो जय तो निश्चित है. श्री गवई, जो कि एक कवि भी हैं, ने इन्होंने पाकिस्तानियों के साथ हुए मुठभेड़ का वर्णन करते हुए सभागार को देशभक्ति के रंग में रंग दिया. 

इसके अलावा कार्यक्रम में शामिल लेखक संजय अग्रवाल की धर्मपत्नी श्रीमती शालिनी अग्रवाल ने उन्हें बधाई दी और पुस्तक को अपने लिए वेलेंटाइन गिफ्ट बताया. पुत्र शुभ्रित ने कहा कि पापा हमेशा एक विनर रहे हैं, यह उनकी एक और जीत है. वहीं पुत्रवधू अपूर्वा ने कहा कि यह एक ऐसी पुस्तक है, जिसे दिमाग से ज्यादा दिल से पढ़ा जाना चाहिए. इसमें जो बातें कही गई हैं, बेहतरी के जो उपाय सुझाए गए हैं, उन्हें अपनाने के लिए बहुत ज्यादा विचार करने की आवश्यकता नहीं है. 

एफ 5 के लेखक संजय अग्रवाल ने पुस्तक के लेखन से प्रकाशन और विमोचन तक की यात्रा के दौरान अपने अनुभव उपस्थिताों के साथ साझा किए और कहा कि उनके विचारों को पुस्तक का रूप देने में बहुत सारे लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिनका वे हृदय से आभार प्रकट करते हैं. ग्लोबल जर्नलिस्ट एंड राइटर्स एसोएिशन के अध्यक्ष और एफ 5 के संपादक संदीप अग्रवाल ने कहा कि बेशक मैंने इस पुस्तक को संपादित किया है, लेकिन इससे ज्यादा पुस्तक ने मुझे संपादित किया है और आज मेरे भीतर जो भी सकारात्मक बदलाव मैं महसूस कर सकता हूॅं, उनका श्रेय इस पुस्तक को ही जाता है. 

कार्यक्रम का संचालन कवयित्री, लेखिका व ​शिक्षिका माधुरी मिश्रा 'मधु' ने किया और आभार प्रदर्शन डॉ. प्रवीण डबली ने किया. उन्होंने प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी साथियों का आभार व्यक्त किया. लेकिन, पूरे संचालन को साहित्यिक रंग देने वाली श्रीमती माधुरी और आयोजन के लिए सभागार की व्यवस्था करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इंस्टिट्यूशन आॅफ इंजीनियर्स, नागपुर के कन्वीनर डॉ. जुगल किशोर अग्रवाल तथा आयोजन के विभिन्न चरणों में अपना सहयोग देने वाले सौरभ सिंह ,पुष्पांश तायल, अनंग कावळे, आदित्य सिंह, प्रज्जवल खंडेलवाल, कौशिक मस्के की डॉ. डबली ने विशेष् रूप से सराहना की. 

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य बुद्धिजीवी, रचनाकार व साहित्यप्रेमी उपस्थित थे. इनमें राजेन्द्र चांदोरकर, जगदीश चंद्र गुप्ता, ज्ञानेश्वर ठाकरे, डॉ. उदय बोधनकर, जयप्रकाश पारेख, अभय भावे, विजय गुप्ते, डॉ. संजय उगेमुगे, मतीन खान, रामानुज असावा, अजय गिरहे, प्रताप शुक्ला, डॉ. प्रवीण वराड़कर, डॉ. कल्पेश उपाध्याय, सीए महेंद्र जैन, सीए नरेश जकोटिया, आशीष तायल, रीमा चड्ढा, केतन गोयल, प्रेमप्रकाश दुबे, प्रकाश माहुले, विनोद दुसेजा, पुरुषोत्तम राज गडकर, मनीषा खंडेलवाल, शौमिक श्रीवास्तव, डॉ. प्रज्ञा माथुर कुमार, डॉ. प्रखर कुमार, एड. रोहन गौतम, मनन धोंदेकर, कोमल मोहतकर, डॉ. ऋषि अग्रवाल, सतीश सारडा, नागेश फरकाड़े, मो. अरशद, विजयश्री खानोनकर, सीए सचिन अग्रवाल, आदि का मुख्य रूप से समावेश रहा.  

ज्ञातव्य है कि लेखक संजय अग्रवाल के प्रेरणात्मक विचारों पर आधारित 365 डिग्री के बाद, एफ5 उनकी दूसरी पुस्तक है, जिसका प्रकाशन अराइजिंग मीडिया एंड एंटरटेनमेंट नागपुर द्वारा किया गया है. F5 एक ऐसी पुस्तक है जो औपचारिक भूमिका की सीमाओं को तोड़ देती है. यह झरने की तरह अविराम ऊर्जा के साथ बहती है और पाठक को तुरंत अपने मूल संदेश के केंद्र में ले जाती है—कि कैसे अपने स्वभाव  और व्यवहार में किए गए छोटे छोटे  बदलाव पूरे जीवन को बदलने की शक्ति रखते हैं. यह आंतरिक बदलाव की प्रक्रिया के माध्यम से व्यक्तिगत संबंधों में गहरी खुशी लाने का संदेश देती है और पेशेवर सफलता की ओर साहसिक नए मार्ग प्रशस्त करती है. पुस्तक का शीर्षक F5 स्वयं कंप्यूटर की ‘रिफ्रेश’ कुंजी की ओर संकेत करता है, जो इसके केंद्रीय विचार को स्पष्ट करता है—वास्तविक विकास, संतुष्टि और उपलब्धि के लिए अपने जीवन में ‘रिफ्रेश’ करना आज की अनिवार्य आवश्यकता है. 

इसी विचार के अनुरूप, पुस्तक की सामग्री को चार  खंडों में विभाजित किया गया है, जिनके नाम परिचित कंप्यूटर कुंजियों पर आधारित हैं. ये खंड पाठक को नवचेतना और आत्म-नवीनीकरण की यात्रा पर मार्गदर्शन करते हैं:

Alt (विकल्प): यह खंड रचनात्मक विकल्पों पर केंद्रित है, जो पाठक को बेहतर निर्णय पहचानने और उन्हें अपनाने में मदद करता है, ताकि जीवन और संबंधों की गुणवत्ता सुधारी जा सके.

Control (नियंत्रण): यह खंड  आत्म-नियंत्रण के लिए प्रेरित करता है और इस बात पर ज़ोर देता है कि दूसरों पर प्रभुत्व जमाने के बजाय अपने कर्मों और प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण ही सच्ची शक्ति है.

Escape (छुटकारा): यह खंड रणनीतिक दूरी बनाने को प्रोत्साहित करता है और प्रतिकूल परिस्थितियों तथा परेशान करने वाले या विषाक्त लोगों के प्रभाव से बाहर निकलने के व्यावहारिक उपाय प्रदान करता है.

Enter (प्रवेश): अंतिम खंड व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है, जहाँ पाठक को अहंकार की सीमाओं—“मैं, मेरा, मुझे”—से आगे बढ़कर दुनिया से अधिक गहराई और सक्रियता के साथ जुड़ने की चुनौती दी जाती है.