देश को बदलना है तो शिक्षा को बदलना होगा: कोठारी
दो दिवसीय महाराष्ट्र ज्ञानसभा सम्मेलन शनिवार से
नागपुर, 2 अप्रैल. 'शिक्षा के विकास के बिना देश के विकास के बारे में नहीं सोचा जा सकता. 'ये विचार शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए व्यक्त किए. विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, नागपुर में कल से आयोजित होने जा रही दो दिवसीय महाराष्ट्र ज्ञान सभा के मौके पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसा नहीं कि विकास नहीं हो रहा, लेकिन यह एक समग्र और संतुलित विकास नहीं है. हमारा आर्थिक विकास तो हो रहा है, लेकिन साथ ही पर्यावरण संकट, नैतिक मूल्यों का ह्रास, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियॉं, महिलाओं का उत्पीड़न आदि भी काफी बढ़ा है. इसलिए, विकास की हमारी परिकल्पना और प्रयासों में भौतिक विकास के साथ—साथ तक आध्यात्मिक विकास का समावेश भी आवश्यक है. उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार और समाज, दोनों को प्रयास करने होंगे. सभी एक—दूसरे को साथ लेकर एक दिशा में आगे बढ़ें, ज्ञानसभा के आयोजन का यही उद्देश्य है.
श्री कोठारी ने बताया कि अभी तक केरल, राजस्थान सहित पॉंच राज्यों में ज्ञानसभाओं का आयोजन हो चुका है. छठवीं ज्ञानसभा का आयोजन महाराष्ट्र में किया जा रहा है, जिसमें कौशल विकास, नवाचार, भारतीय ज्ञान परंपरा, और उत्कृष्ट मानकों से युक्त उच्चशिक्षा जैसे विषयों पर विमर्श किया जाएगा.
इस अवसर पर उनके साथ वीएनआईटी के डायरेक्टर प्रो. प्रेमलाल पटेल, आरटीएमएनयू की कुलगुरु प्रो. मनाली क्षीरसागर, गोंडवाना विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. प्रशांत बोकारे ने भी पत्रकारों से अपने विचार साझा किए. उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र ज्ञानसभा का आयोजन विदर्भ अंचल के इन चार महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थानों के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा है.
ज्ञानसभा के बारे में जानकारी देते हुए प्रो. पटेल ने बताया कि इस सम्मेलन का एक प्रमुख उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों की उत्कृष्ट कार्यनीति को साझा करना, संस्थान में चल रहे नवाचारों और बेस्ट प्रैक्टिसेज का प्रचार—प्रसार करना है. उन्होंने यह भी कहा कि सम्मेलन में भारतीय ज्ञान परंपरा की वर्तमान में प्रासंगिकता और उपयोगिता के महत्व को सामने रखने पर विशेष जोर दिया जाएगा.
पत्रकारों को संबोधित करते हुए श्रीमती क्षीरसागर ने बताया कि सम्मेलन में रोजगारोन्मुख नवाचारों, छात्रों के समग्रं विकास और राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़े विषयों पर गहन चर्चा होगी. वहीं प्रो. बोकारे ने जानकारी दी कि महाराष्ट्र ज्ञानसभा में विदर्भ से संबंधित शैक्षिक योजनाओं और शैक्षणिक संस्थानों के परस्पर सहयोग आदि पर भी समुचित विचार—विमार्श होगा.
विदर्भ उद्योग संघ के चेयरमैन रवलीन खुराना ने अपने वक्तव्य में कहा कि इस समय सभी उद्योगों को कुशल कार्मिकों की कमी से जूझना पड़ रहा है, जिसकी अहम वजह यह है कि अभी हमारे छात्र इंडस्ट्री रेडी नहीं हैं. इस गैप को पाटने के लिए जरूरी माइंडसेट डेवलप करने के लिए, ज्ञानसभा में उद्योगों की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन 4 अप्रैल को सुबह 10.00 बजे, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस द्वारा और समापन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी की उपस्थिति में 5 अप्रैल की शाम किया जाएगा. सम्मेलन के दौरान देश और राज्य की अनेक गणमान्य राजनीतिक व औद्योगिक विभूतियों की उपस्थिति रहेगी, जिनमें शालेय शिक्षण मंत्री पंकज जी भोयर, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, उच्चशिक्षा मंत्री चंद्रकांत दादा पाटिल, वित्त एवं कानून राज्य मंत्री आशीष जायसवाल, नागपुर की महापौर नीता ताई ठाकरे, विदर्भ औद्योगिक विकास संघ के अध्यक्ष आशीष काळे, लायड्स ग्रुप के एमडी बी. प्रभाकरन, सोलर इंडस्ट्रीज के सत्यनारायण नुवाल आदि के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं.
पत्रकार सम्मेलन का संचालन व आभार प्रदर्शन सत्येन्द्र प्रताप सिंह, विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी)- हिंदी, विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, ने किया.
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