मायने
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लोगों को मिला
एक सुंदर जीवन 
पर लोग समझे नहीं
ईष्या ,द्वेष ,लोभ ,मोह में
जीवन को उलझा दिया
परेशानियां ,गफलत ,नफरत
जाने कैसे कैसे शब्दों ने
घुसपैठ कर दी
कोमल ,नाज़ुक एहसास
मन के कोने में दुबके, दबे रह गए
लोगों ने समझे ही नहीं
सही मायने...

देखो ना....
दिवाली आई
और पटाखों में जलकर
कागज़ी कचरे और धुंए का नाम लिए
चली भी गई...
कितनी दुआओं ने 
मोबाइल और कम्प्यूटर पर
चमकीले अक्षरों से 
अपनी शुभकामनाओं को शब्द दिए
आंखों और कानों तक 
सबकी आवाज़ तो पहुंची मगर
सबके हृदय तक कोई मिठास
पहुंची ही नहीं
चेहरे हंसे तो मगर
हर मन मुस्कुराया नहीं....

चमकते घरों 
दमकते दीपकों की लौ में
जाने कितने अंधेरे
कितने कोनों में सिसकते रहे
उजाला कुछ कोनों में पहुंचा ही नहीं
आसमान का अंधेरा
रौशनियों ने दूर कर दिया....
मन के ये अंधेरे
हटे ही नहीं.......

उत्सव के संस्कारों से
नियम कायदों से 
विधि विधानों से
पकवानों से उपहारों से
बहुत ज़रूरी है जीना
उत्सव को , जीना जीवन को
सही मायनों में
सही अर्थों में सही पैमानों में
असल मिठास में
ताकि रहे......एहसास
रौशनी का सदा..

कोई अंधेरा किसी को 
कभी डराये नहीं
जीवन का उत्सव बनावटी न लगे 
इतनी मिठाईयों की ज़रूरत न पड़े
अपनेपन की मिठास कभी
किसी रिश्ते में कम न पड़ें
चेहरे हंसे तो कहीं पीछे कुछ छुपा न रहे
हर घर में खुशियों की रौशनी हो
जीवन के ये उत्सव असल खुशी दें 
इनका असर मौसमी न हो....

 

(मूल रूप से छत्तीसगढ़ की  रीमा दीवान चड्ढा एक स्थापित कवयित्री ,लेखिका एवं प्रकाशक हैं, वर्तमान में नागपुर में रहती हैं और अपने प्रकाशन सृजन बिंब द्वारा सौ से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन कर चुकी हैं. सृजन बिंब के माध्यम से उन्होंने दर्जनों नवोदिन लेखकों की पुस्तकें प्रकाशित कर, उन्हें साहित्य के आकाश में सितारा बनकर चमकने का अवसर प्रदान किया है.)