वर्ल्ड स्टोरीटेलिंग डे पर आॅनलाइन परिचर्चा 
नियम—कानून व्यवस्था बनाते हैं, कहानियॉं समाज बनाती हैं— नवीन अग्रवाल 
कहानियॉं जिंदगी से निकलती हैं, और जिंदगी कहानियों से बनती है—डॉ. संदीप 

नागपुर, 20 मार्च. आज यहॉ विश्व किस्सगोई दिवस पर 'जिंदगी और सोच बदलने वाली कहानियॉं' विषय पर एक आॅनलाइन परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया. ग्लोबल जर्नलिस्ट एंड राइटर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग दो दर्जन प्रतिभागियों ने अपने विचार प्रकट किए. 

मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए संडे नवभारत टाइम्स के पूर्व संपादक राजेश मित्तल ने एक मर्मस्पर्शी कहानी साझा करते हुए कहा कि अलग—अलग दौर में अलग—अलग प्रकार की कहानियों का प्रभाव हम पर पड़ता है, असली कहानी वही होती है जो हमारी संवेदनशीलता को जगाए और हमें एक बेहतर इंसान बनाने में मदद करे. 

वहीं कार्यक्रम अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, सूचना अधिकार से संबंधित मामलों के विशेषज्ञ और कुलसचिव—दादा रामचंद भाखरू सिंधु महाविद्यालय, नागपुर,  ने अपने ताया जी का एक ​कथन कि लोग चले जाते हैं और किस्से रह जाते हैं, का उल्लेख करते हुए एक स्थानीय व्यवसायी दिवंगत दुर्गा प्रसाद सर्राफ के जीवन का एक विस्मित कर देने वाला अनुभव साझा किया और कहा कि नियम और कानून व्यवस्थाएं चलाते हैं, जबकि कहानियॉं समाज को चलाती हैं.

कार्यक्रम में सूरज तेलंग, नरेश गोयल, डॉ. प्रवीण डबली, रीमा चड्ढा, मधु पटोरिया, सुरेन्द्र गेडाम,  माधुरी मिश्रा, पंकज चौधरी,डॉ. नेहा कल्याणी, वासवानी, समर्थ वेदांती, सृजन स्वरूप, आदि ने शिरकत की. इस अवसर पर वक्ताओं ने विभिन्न कहानियों और फिल्मों के बारे में अपनी भावनाएं और अनुभव साझा किए, जिनमें भगवान श्रीराम और कौशल्या से संबंधित एक प्रसंग, संथारा, इन टू द वाइल्ड, निमाई भट्टाचार्य के उपन्यास मेम साहब, डॉ. धर्मवीर भारती की कहानी इदम हमम, चंद्रधर शर्मा गुलेरी की उसने कहा था, प्रेमचंद की ईदगाह, आशीष बागरेचा की कहानी आदि रचनाओं और उनके प्रभाव पर विस्तार से चर्चा संभव हुई. अनेक प्रतिभागियों ने बेहत प्रभावशाली ढंग से वास्तविक जीवन से जुड़े अनुभव भी बॉंटे. कार्यक्रम का श्रोताओं का भी भरपूर प्रोत्साहन मिला, जिनमें वसंत पारधीशोएब कमल, पराग अग्रवाल, चैताली दारोड़े, आदि के नाम प्रमुख हैं.

कार्यक्रम का संयोजन कार्यकारी सचिव प्रा. सूरज तेलंग व अतिथियों का स्वागत, कार्यक्रम संचालन व धन्यवाद प्रदर्शन प्रो. सौरभ सिंह द्वारा किया गया. कार्यक्रम का समापन करते हुए ग्लोबल जर्नलिस्ट एंड राइटर्स एसोएिशन के अध्यक्ष डॉ. संदीप अग्रवाल ने कहा कि इस पूरे कार्यकम का सार एक लाइन में निकाला जा सकता है तो वह यह है कि कहानियॉं जिंदगी से निकलती है, और जिंदगी कहानियों से बनती है.