3 दिन के लिए बंद हो जाते हैं यूपी के इस चमत्कारी मंदिर के कपाट, तब महिलाएं संभालती हैं कमान
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की जसराना तहसील में स्थित मां कामाख्या देवी धाम आस्था और चमत्कार का एक अद्भुत केंद्र है. यह मंदिर उन भक्तों के लिए बेहद खास है जो गुवाहाटी तक नहीं जा सकते, क्योंकि यहां की पूजा पद्धति और मान्यताएं बिल्कुल गुवाहाटी के कामाख्या शक्तिपीठ जैसी ही हैं. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां मनाया जाने वाला ‘अम्बुवाची महोत्सव’ है, जिसके दौरान तीन दिनों के लिए मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं.
मंदिर के महंत महेश स्वरूप ब्रह्मचारी ने लोकल 18 को बताया कि इस धाम की स्थापना लगभग 80 साल पहले उनके गुरुजी ने की थी. शुरुआत में यहां एक छोटा सा मंदिर था जहां गुरुजी मां की आराधना करते थे. मान्यता है कि एक बार मंदिर में स्थापित मूर्ति से अचानक खून के धब्बे निकलने लगे थे. इसे देखकर गुरुजी ने अनुभव किया कि माता ने यहां वही चमत्कार दिखाया है जो गुवाहाटी के शक्तिपीठ में देखने को मिलता है. तभी से यहां श्रद्धा और विश्वास का सिलसिला शुरू हुआ और आज यहां दूर-दूर से भक्त अपनी मुरादें लेकर आते हैं.
क्यों और कैसे बंद किए जाते हैं मंदिर के पट?
जून के महीने में जब अम्बुवाची महोत्सव शुरू होता है, तो सुहागन महिलाओं का चयन किया जाता है जो मंदिर के कपाट बंद करने की प्रक्रिया पूरी करती हैं. इस दौरान तीन दिनों तक माता एकांत में रहती हैं और भक्तों के लिए दर्शन बंद रहते हैं. तीन दिन पूरे होने के बाद महिलाएं ही दोबारा मंदिर के कपाट खोलती हैं, जिसके बाद मां की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस साल इस महोत्सव की शुरुआत 22 जून से होगी, जिसमें 9 माताओं द्वारा सुबह 5 बजे मंगला आरती के बाद मंदिर के पट बंद किए जाएंगे.
गुवाहाटी के बाद जसराना में उमड़ती है भारी भीड़
गुवाहाटी के बाद जसराना का यह इकलौता मंदिर है जहां इतनी भव्यता के साथ अम्बुवाची महोत्सव मनाया जाता है. नवरात्रि के दौरान यहां विशेष हवन और यज्ञ किए जाते हैं, जहां लोग सिद्धियां प्राप्त करने के लिए अनुष्ठान करते हैं. महोत्सव के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु न सिर्फ उत्तर प्रदेश, बल्कि आसपास के राज्यों से भी यहां पहुंचते हैं. भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा और दर्शन के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं ताकि हर कोई शांति से मां के दर्शन कर सके.
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