अमेरिका पहुंचा ‘समंदर का सिकंदर’, ईरान बॉक्स ऑफिस पर नहीं चला जादू
वॉशिंगटन: दुनिया का सबसे विशाल और अत्याधुनिक अमेरिकी युद्धपोत 'जेराल्ड आर. फोर्ड' करीब एक साल तक समुद्र में रहकर कई बड़े सैन्य अभियानों को अंजाम देने के बाद आखिरकार स्वदेश लौट आया है। शनिवार को इस महाकाय एयरक्राफ्ट कैरियर ने वर्जीनिया के नॉरफॉक पोर्ट पर लंगर डाला। वियतनाम युद्ध के बाद से किसी भी अमेरिकी युद्धपोत की यह अब तक की सबसे लंबी ऑपरेशनल तैनाती मानी जा रही है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक सैन्य रणनीतियों का मुख्य केंद्र रहा यह जहाज वेनेजुएला संकट और ईरान युद्ध जैसे बड़े मोर्चों पर तैनात था। हालांकि, इसकी अत्यधिक लंबी तैनाती अमेरिकी सैन्य क्षमता पर सवाल खड़े कर रही थी, जिसके बाद इसे वापस बुलाने का फैसला लिया गया।
अपनों की वापसी पर भावुक हुए परिवार और रक्षा मंत्री ने बढ़ाया हौसला
जैसे ही यह विशाल युद्धपोत नॉरफॉक पोर्ट पर पहुंचा, वहां का माहौल बेहद भावुक हो गया। अपने प्रियजनों के इंतजार में खड़े सैकड़ों परिवारों ने आंसुओं और स्वागत पोस्टरों के साथ नाविकों का जोरदार स्वागत किया। इस ऐतिहासिक और राहत भरे पल का गवाह बनने के लिए अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी खुद वहां मौजूद रहे। उन्होंने फोर्ड कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के नाविकों की असाधारण बहादुरी और देश सेवा की जमकर सराहना की।
अत्यधिक तनाव, रसद की कमी और सैनिकों में बढ़ता असंतोष
आमतौर पर किसी भी एयरक्राफ्ट कैरियर को अधिकतम 7 महीनों के लिए ही समुद्र में तैनात किया जाता है, लेकिन बदलती वैश्विक परिस्थितियों के कारण यह मिशन 11 महीने तक खिंच गया। इतनी लंबी तैनाती की वजह से सैनिकों में भारी शारीरिक और मानसिक थकान देखी जा रही थी। उनके परिवारों ने शिकायत की थी कि कई दिनों तक सैनिकों से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था और जहाज पर जरूरी रसद (सामान) की भी किल्लत होने लगी थी। अत्यधिक तनाव का आलम यह था कि कुछ नाविकों ने लौटते ही सेना की नौकरी तक छोड़ने की बात कह दी है। शीर्ष नौसैनिक अधिकारियों ने भी यह माना है कि भविष्य में सैनिकों को इतने लंबे समय तक तनाव में रखने से बचना चाहिए।
तकनीकी खामियां और ईरान युद्ध के दौरान लगी भीषण आग
इस ऐतिहासिक सफर के दौरान लगभग 13 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक) की भारी-भरकम लागत से बने इस पोत के भीतर कई गंभीर तकनीकी कमियां भी सामने आईं। सफर के दौरान जहाज के टॉयलेट्स खराब हो गए थे। इसके अलावा, मार्च में ईरान युद्ध के दौरान इसके लॉन्ड्री एरिया में अचानक भीषण आग लग गई थी, जिसे बुझाने में नौसेना को करीब 30 घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। उस दौरान स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि 600 से अधिक नाविकों को अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होना पड़ा था।
अमेरिकी नौसेना की रीढ़ और इसकी आधुनिक तकनीक
तमाम चुनौतियों और विवादों के बावजूद यह युद्धपोत अमेरिकी रक्षा तंत्र की असली रीढ़ माना जाता है। वेनेजुएला और ईरान के खिलाफ चले ऑपरेशन्स के दौरान इसी जहाज से फाइटर जेट्स ने उड़ान भरी थी। इस जहाज की सबसे बड़ी खासियत इसका 'एडवांस इलेक्ट्रॉनिक कैटापल्ट सिस्टम' है, जो छोटे ड्रोनों से लेकर भारी लड़ाकू विमानों को भी बेहद आसानी से हवा में लॉन्च कर सकता है। यह आधुनिक तकनीक अमेरिका के बाकी पुराने 10 विमानवाहकों में भी मौजूद नहीं है। पिछले साल जून में वर्जीनिया से रवाना होने के बाद इस युद्धपोत ने अटलांटिक, भूमध्य सागर, नॉर्वे, कैरेबियन और मिडिल ईस्ट के अशांत समंदरों का सफर तय किया और अब यह आखिरकार अपने देश वापस आ चुका है।
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