मतदाता सूची विवाद पर बढ़ी हलचल, ESC के पत्र का ECI ने नहीं दिया जवाब
भोपाल | मध्य प्रदेश के उन लाखों मतदाताओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है, जिनके नाम स्पेशल इंफॉर्मेशन रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) के एक अहम फैसले के बाद अब इन वोटर्स को परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। एसआईआर लिस्ट से नाम गायब होने के बावजूद ये मतदाता अगले साल होने वाले नगरीय निकाय (नगर निगम) और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे। दरअसल, वोटर लिस्ट में सुधार को लेकर राज्य आयोग ने केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) से कई बार संपर्क साधा था, लेकिन वहां से कोई प्रतिक्रिया न मिलने के कारण अब राज्य आयोग ने खुद यह रास्ता निकाला है।
केंद्रीय चुनाव आयोग को 4 बार लिखा पत्र, पर नहीं मिला कोई जवाब
पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) ने बीती 21 फरवरी को अपनी आखिरी मतदाता सूची जारी की थी। इस सूची में विसंगतियां दिखने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्टीकरण और अपडेटेड डेटा के लिए केंद्रीय आयोग को पत्र लिखा था। हैरानी की बात यह है कि राज्य आयोग द्वारा एक के बाद एक कुल चार बार रिमाइंडर पत्र भेजे जाने के बावजूद दिल्ली से कोई जवाब नहीं आया। चुनावी नियमों के अनुसार, यदि केंद्रीय सूची से किन्हीं कारणों से नाम कट भी जाता है, तो राज्य निर्वाचन आयोग के पास यह अधिकार होता है कि वह स्थानीय चुनावों के लिए योग्य मतदाताओं के नाम अपनी सूची में शामिल कर सके।
18 जून को आएगी अंतिम सूची, 34 लाख वोटर्स को फिर मिलेगा मौका
राज्य निर्वाचन आयोग ने आगामी स्थानीय चुनावों की तैयारियों का हवाला देते हुए केंद्रीय आयोग से एसआईआर डेटा की मांग की थी, ताकि प्रदेश की वोटर लिस्ट को पूरी तरह त्रुटिहीन बनाया जा सके। वहां से सहयोग न मिलने के बाद अब राज्य आयोग ने स्वतंत्र रूप से काम शुरू कर दिया है और आगामी 18 जून को फाइनल वोटर लिस्ट जारी करने की घोषणा की है। इस फैसले से उन करीब 34 लाख मतदाताओं को सीधा फायदा होगा, जिनके नाम 21 फरवरी को केंद्रीय आयोग द्वारा जारी एसआईआर लिस्ट से साफ कर दिए गए थे। अब ये सभी नागरिक दोबारा जरूरी दस्तावेज जमा करके स्थानीय स्तर पर अपना नाम जुड़वा सकेंगे और वोट डाल सकेंगे।
तालमेल की कमी से बढ़ी उलझन, अब दस्तावेजों का दोबारा होगा वेरिफिकेशन
इस प्रशासनिक खींचतान पर रोशनी डालते हुए संयुक्त मुख्य राज्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि राज्य आयोग ने रिवीजन (पुनरीक्षण) प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए वोटर्स का पूरा डेटा मांगा था। हालांकि, केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने अपने जवाब में स्पष्ट कर दिया कि वे इस तरह की रिवीजन प्रक्रिया के लिए अलग से लिस्ट उपलब्ध नहीं कराते हैं। दोनों बड़े निर्वाचन निकायों के बीच समन्वय (कोऑर्डिनेशन) की इस कमी का सीधा असर आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियों पर पड़ता दिख रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए अब राज्य आयोग प्रभावित 34 लाख नागरिकों के दस्तावेजों का दोबारा सत्यापन (वेरिफिकेशन) करवाकर उन्हें मुख्यधारा की वोटर लिस्ट में शामिल करने की कवायद में जुट गया है।
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