राजभाषा कार्यान्वयन पर चिंतन आवश्यक : डॉ. मनाली क्षीरसागर
नागपुर, 3 जुलाई : राजभाषा हिन्दी भारत की पहचान है। यह भारतीय संस्कृति और लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है। इसकी उपयोगिता केवल सरकारी कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, तकनीक, मीडिया, व्यापार और वैश्विक संचार तक विस्तृत है। सूचना और तकनीक के क्षेत्र में हिन्दी की स्वीकार्यता दिनोंदिन बढ़ रही है। राजभाषा कार्यान्वयन पर निरंतर चिंतन की आवश्यकता है। यह बात राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने कही। वे विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग तथा शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली एवं नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, नागपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित "राजभाषा सम्मेलन" के उद्घाटन सत्र में बोल रही थीं।

यह आयोजन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में 'भारतीय शिक्षा दिवस' के रूप में किया गया। इसमें नागपुर में स्थित चारों नराकास के ५५ राजभाषा अधिकारियों ने सहभागिता की। उन्होंने कहा कि राजभाषा हिन्दी का विकास विकसित भारत के लिए जरूरी है। राजभाषा हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय एकता और जनसंपर्क का सशक्त माध्यम है। कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज पाण्डेय ने कहा कि राजभाषा सेतुबंध का काम करती है। संघीय प्रणाली के संचालन में राजभाषा की महती भूमिका है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत मातृभाषा एवं भारतीय भाषाओं को बढ़ावा मिल रहा है।

पावरग्रिड कार्पोरेशन आफ इंडिया के कार्यपालक निदेशक अशोक कुमार बेहेरा ने उद्घाटन सत्र में कहा कि
सूचना एवं तकनीक के क्षेत्र में हिन्दी का व्यापक उपयोग हो रहा है। प्रो. ज्ञान प्रकाश सिंह, प्रभारी निदेशक , वीएन आईटी ने बताया कि समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में हिन्दी का बेहतर प्रयोग हो रहा है। वास्तव में, सोशल मीडिया ने हिन्दी को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्रदान की है।
वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, नागपुर के मानव संसाधन महाप्रबंधक राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि व्यापार, विपणन और उपभोक्ता संचार में हिन्दी का महत्व बढ़ा है। राजभाषा में कामकाज बढ़ा है। तकनीकी रूप से राजभाषा में कार्य करना आज सुविधाजनक हो गया है। बैंक ऑफ इंडिया के उप आंचलिक प्रबंधक पन्ना मंडल ने कहा कि ई-कॉमर्स एवं डिजिटल मार्केटिंग में हिन्दी सामग्री की मांग निरंतर बढ़ रही है।पत्रकारिता, अनुवाद, कंटेंट राइटिंग, मीडिया, पर्यटन, प्रकाशन, डिजिटल मार्केटिंग और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में हिन्दी विशेषज्ञों की मांग निरंतर बढ़ रही है।
तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए राजभाषा अधिकारी उदयवीर सिंह ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी, एआई, ई-गवर्नेंस तथा डिजिटल माध्यमों में हिन्दी का प्रयोग बढ़ रहा है। हिन्दी में सॉफ्टवेयर, मोबाइल एप, वेबसाइट एवं डिजिटल सामग्री का विकास हो रहा है। आज राजभाषा में काम करना आसान है।
डॉ. वंदना खुशालानी ने कहा कि हिन्दी में मशीन अनुवाद, वॉयस असिस्टेंट, चैटबॉट और AI आधारित सेवाओं का तेजी से विकास हो रहा है, जिससे हिन्दी का भविष्य और अधिक उज्ज्वल दिखाई देता है। कार्यक्रम का संचालन लखेश्वर चंद्रवंशी ने तथा आभार प्रदर्शन सत्येन्द्र प्रसाद सिंह ने किया।
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