किताबों से बनी बच्चों की दुनिया
मरयम मिर्ज़ा मोहल्ला बाल पुस्तकालय अभियान,एक 12 साल की लड़की का जादुई सपना
छत्रपती संभाजीनगर (औरंगाबाद), 24 नवंबर। ज्ञान जीवन का आधार है और पुस्तकें ज्ञान का। लेकिन, सभी को पुस्तकों का साथ नसीब हो, जरूरी नहीं। ऐसे में सामने आते हैं मरियम जैसे उत्साही बच्चे और रीड एंड लीड फाउंडेशन जैसी संस्थाएं, जो किताबों और जरूरतमंदों के बीच एक पुल का काम करते हैं। इन्हीं के प्रयासों का नतीजा है कि आज तीन दर्जन से अधिक 300 से 1200 किताबों वाले मोहल्ला बाल पुस्तकालय अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनके जरिये हर महीने 18,000 से 20,000 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं।
इस विशाल पेड़ का अंकुर फूटा, चार साल पहले वर्ष 2021 में हुई, जब पूरा देश कोविड-19 की लहर से शुरू लॉकडाउन के जैसे अपने—अपने दायरे में नजरबंद था। किताबों की शौकीन 12 साल की मरियम अपनी 150 किताबों को देखकर सोच रही थी कि उसकी दोस्त तो किताबें हैं, लेकिन बाकी बच्चों का क्या? अगर उनकी पढ़ने की आदत छूट गई तो बहुत बुरा होगा।
मरयम ने अपने पिता सामाजिक कार्यकर्ता मिर्ज़ा अब्दुल कय्यूम नदवी से बात की। पिता, जो खुद एक बुक स्टोर के मालिक और रीड एंड लीड फाउंडेशन के फाउंडर और अध्यक्ष हैं। उन्होंने इस मिशन में उसका पूरा साथ दिया और देखते ही देखते डोनेशन से 300 किताबें इकट्ठा हो गईं। एडवेंचर स्टोरीज़ से लेकर महान हस्तियों की बायोग्राफ़ी तक उर्दू, हिंदी, अंग्रेज़ी, मराठी — हर भाषा की किताबें। बरामदे में एक छोटी-सी अलमारी लगाई गई। नाम रखा — “डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम लाइब्रेरी”। पहले दिन सिर्फ़ 5-6 बच्चे आए। लेकिन एक हफ़्ते में ख़बर फैल गई। बच्चे किताबें उधार लेने लगे — कोई चार्ज नहीं, बस एक नियम: “पढ़ो, समझो, और लौटाओ।”
घरों के बरामदों से लेकर मस्जिदों, मदरसों, सरकारी स्कूलों और अनाथालयों तक, ज्ञान का यह वृक्ष लगातार अपनी शाखाएं फैला रहा है और आज छत्रपती संभाजीनगर ही नहीं, बल्कि बुरहानपुर और परभणी आदि क्षेत्रों में भी ये पुस्तकालय बच्चों के लिए ज्ञान और मनोरंजन पाने का प्रमुख माध्यम बने हुए हैं। नन्हा सिपाही, चाँदनी रात, उड़ान...सरीखे इनके नाम भी बिल्कुल बच्चों और उनके सपनों से जुड़े हुए हैं। और इससे भी दिलचस्प बात, इन लाइब्रेरियों को संचालन भी खुद बच्चे ही करते हैं।
अपने इस अनूठे सपने को साकार करने के लिए मरियम की लगन, मेहनत को हर तरफ से सराहना मिली है। उसे अमेरिकन फेडरेशन ऑफ मुस्लिम्स ऑफ इंडियन ओरिजिन का अवॉर्ड, लोकमत मुक्ता सम्मान जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है। मरियम का सपना है कि महाराष्ट्र-तेलंगाना के बाद कर्नाटक, उत्तर प्रदेश... देश के हर शहर, हर गली में एक लाइब्रेरी होनी चाहिए, जब तक हर बच्चे के हाथ में किताब न नजर आए।
रीड एंड लीड फाउंडेशन: मरयम के इस मिशन में रीड एंड लीड फाउंडेशन उसका सबसे बड़ा हमसफ़र रहा है। 2020 में छत्रपती संभाजीनगर में स्थापित यह फाउंडेशन एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो बच्चों और वयस्कों में किताब पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। फाउंडेशन का मूल मंत्र है: “हर घर में किताब, हर दिल में ज्ञान।” फाउंडेशन ने अब तक शहर के स्लम्स, मस्जिदों, उर्दू स्कूलों और मोहल्लों में 36 से ज़्यादा लाइब्रेरी स्थापित की हैं। इसके अलावा, यह वर्ल्ड बुक डे जैसे अवसरों पर किताब वितरण कार्यक्रम आयोजित करता है, और उर्दू में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की दुर्लभ किताबों का संग्रह तैयार कर भाषाई बाधाओं को तोड़ता है। “बुक एट होम, बुक एट एवरी होम” कैंपेन फाउंडेशन की एक अनूठी पहल है, जो हर परिवार तक किताबें पहुँचाने का लक्ष्य रखता है। हाल ही में, उर्दू मीडियम के छात्रों को मराठी भाषा से जोड़ने के लिए फाउंडेशन की ओर से 25,000 पोस्टकार्ड्स भेजने का अभियान चलाया गया, जिसमें छात्रों ने मराठी में निबंध लिखे।
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