प्रधानमंत्री जनमन योजना से बुचूराम को मिला पक्का आशियाना
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत जरूरतमंद एवं कमजोर वर्ग के परिवारों को सुरक्षित आवास एवं मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में जशपुर जिले के बगीचा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत पंडरापाठ निवासी बुचूराम को प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत पक्का आवास प्रदान किया गया है।
बुचूराम लकड़ी और पैरा से निर्मित कच्चे घर में परिवार सहित निवास करते थे, जहाँ वर्षा, धूप एवं जीव-जंतुओं से उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। दैनिक मजदूरी कर जीवनयापन करने वाले बुचूराम आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं थे कि स्वयं पक्का मकान बनवा सकें। प्रधानमंत्री जनमन योजना उनके लिए आशा की किरण बनकर आई, जिसके अंतर्गत उन्हें सुरक्षित, स्थायी एवं पक्का आवास उपलब्ध कराया गया।
बुचूराम ने बताया कि अब उनके पास प्रधानमंत्री जनमन योजना के आवास के साथ-साथ आधार कार्ड, राशन कार्ड एवं आयुष्मान कार्ड जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से वे शासकीय योजनाओं का नियमित लाभ प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पक्का मकान मिलने से अब उनका परिवार सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन जी रहा है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के परिवारों को प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से आवासीय सुविधा के साथ-साथ स्वास्थ्य, राशन एवं अन्य मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इससे ऐसे परिवारों को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जा रहा है।
एमपी में दिखने लगा ईरान-इज़राइल युद्ध का असर, भोपाल में कमर्शियल गैस सिलेंडर पर रोक
हिंसा के बाद पश्चिम गारो हिल्स में कर्फ्यू लागू
पावर कंजम्प्शन में उछाल: फरवरी में देश की बिजली खपत 133 अरब यूनिट पहुंची
ट्रंप प्रशासन से टकराई एआई कंपनी एंथ्रोपिक, पेंटागन के खिलाफ अदालत पहुंचा मामला
सोना-चांदी में जबरदस्त उछाल: चांदी ₹9250 महंगी, सोना ₹1.62 लाख पर
हरे निशान के साथ खुला बाजार: BSE Sensex 656 अंक उछला, NSE Nifty 50 24,200 के पार
बेटे के साथ हुए व्यवहार पर बोले संजू सैमसन के पिता—उम्मीद है अब ऐसा नहीं होगा
लोक निर्माण विभाग की महिला कर्मचारी रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ी
टी20 वर्ल्ड कप में दो बार फाइनल हारने वाले देश, खिताब के करीब पहुंचकर भी रह गए खाली हाथ