विदर्भ का गरबा 'दंडार'
मराठी लोकनाट्यों की जननी माना जाने वाला दंडार, महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र का एक प्रसिद्ध लोकनृत्य है। लोकभाषा और दिल को छू लेने वाले विषयों के चयन के कारण, यह आज भी आंचलिक लोकजीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन हुआ है। ये लोगों को एक - दूसरे से मिलने - जुलने की प्रेरणा और अवसर, दोनों प्रदान करता है। ये संबंधों का उत्सव है, और विदर्भ की लोक संस्कृति की आधारशिला।
यह कला अब धीरे—धीरे लुप्त होने के कगार पर है। फिर भी, विदर्भ के ग्रामों और छोटे—छोटे अंचलों में स्थानीय स्तर पर इसे जीवित रखने के लिए प्रयास जारी हैं। दीपावली के अवसर पर, पिछले सप्ताह शुक्रवार को भंडारा जिला, तुमसर तहसील के गॉंव चिचोली में प्राथमिक शाला के प्रांगण मे दंडार (खडी गम्मत) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम मे चिचोली ग्राम के सरपंच देवदास झाड़ेकर, कृषि उत्पादन बाजार समिति के सभापति हरेन्द्र रहांगडाले, पोलिस पाटिल सुरेश कालसर्पे व ग्राम पंचायत के पदाधिकारियों समेत बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
वीडियो: वसंत पारधी, नागपुर
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